विश्व टीबी दिवस: फेफड़ों को मजबूत बनाने वाले 5 योगासन, टीबी मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद
ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। इसका इलाज लंबे समय तक दवाइयों से किया जाता है, लेकिन योग को सहायक थेरेपी के रूप में अपनाने से रिकवरी तेज हो सकती है। योग न सिर्फ शरीर को मजबूत करता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है, जो टीबी मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।
हालांकि टीबी का इलाज केवल योग से संभव नहीं है। यह एक सहायक उपाय है जो दवाइयों के साथ मिलकर बेहतर परिणाम देता है। यह टीबी मरीजों के लिए सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करता है। सही आसनों और प्राणायाम को अपनाकर फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं। योग से सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है और शरीर की थकान व कमजोरी कम करता है।
आइए जानते हैं टीबी के मरीजों के लिए सबसे असरदार योगासन कौन से हैं।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
यह प्राणायाम फेफड़ों को साफ करता है और ऑक्सीजन लेवल बढ़ाता है। इसका अभ्यास रोजाना 10 से 15 मिनट करें।
भुजंगासन
भुजंगासन का अभ्यास छाती को खोलता है और फेफड़ों को मजबूत बनाता है। यह आसन सांस लेने में सुधार करता है।
कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास से शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद मिलती है। यह फेफड़ों की सफाई के लिए लाभकारी प्राणायाम माना जाता है। ध्यान दें, इसका अभ्यास टीबी मरीज डॉक्टर की सलाह से ही करें।
मार्जरी आसन (कैट काऊ पोज)
इस आसन को कैट काऊ पोज भी कहते हैं। यह सांस और शरीर के तालमेल को बेहतर बनाता है। साथ ही छाती और रीढ़ को लचीला करता है।
सेतु बंधासन
यह आसन छाती को खोलने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। सेतु बंधासन के नियमित अभ्यास से सांस लेने में आसानी होती है और शरीर को ऊर्जा मिलती है।
टीबी मरीजों के लिए योग फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने, इम्यूनिटी मजबूत करने और रिकवरी तेज करने में मददगार होता है। प्राणायाम, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम जैसे आसन विशेष रूप से फायदेमंद माने जाते हैं।