अबू धाबी परीक्षा केंद्र विवाद: NTA का बड़ा खुलासा, छात्र के खाते से हुआ था बदलाव
री-नीट 2026 से जुड़े अबू धाबी परीक्षा केंद्र विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इस मामले में अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए चौंकाने वाली जानकारी साझा की है। एजेंसी के अनुसार, नागपुर के छात्र को अबू धाबी का केंद्र मिलना कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं थी, बल्कि यह बदलाव छात्र के अपने रजिस्टर्ड अकाउंट से किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद नागपुर के रहने वाले छात्र अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब से जुड़ा है। जब छात्र ने री-नीट 2026 के लिए अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड किया, तो उसमें परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी (यूएई) का एक भारतीय स्कूल दर्ज था। छात्र के पिता डॉ. मोहम्मद तालिब ने दावा किया कि उनके बेटे के पास पासपोर्ट नहीं है और प्रवेश पत्र देखकर वह सदमे में आ गए। प्रवेश पत्र का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया था।
NTA के डिजिटल सबूतों से हुआ खुलासा
एनटीए ने अपने वेब-एक्टिविटी रिकॉर्ड्स के आधार पर बताया कि परीक्षा केंद्र में बदलाव किसी तकनीकी खराबी के कारण नहीं, बल्कि छात्र के रजिस्टर्ड लॉगिन क्रेडेंशियल्स के जरिए ही किया गया था। एजेंसी के अनुसार:
- जब परीक्षा की तारीख 21 जून तय होने के बाद सिटी करेक्शन विंडो खोली गई, तब छात्र के खुद के लॉगिन आईडी और पासवर्ड से केंद्र को अबू धाबी में बदला गया।
- रिकॉर्ड्स में लगातार एक ही सिंगल-यूजर का एक्सेस पैटर्न पाया गया है।
- छात्र के क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एक बार केंद्र बदला गया और दो बार इसका प्रीव्यू देखा गया, यानी कुल तीन मौकों पर यह बात सिस्टम में दर्ज हुई।
एनटीए ने अपनाया ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ दृष्टिकोण
हालांकि एनटीए के रिकॉर्ड्स से यह स्पष्ट था कि गलती छात्र के स्तर पर हुई थी, फिर भी एजेंसी ने छात्र के भविष्य को ध्यान में रखते हुए तुरंत कार्रवाई की। एनटीए के अनुसार:
- 19 जून की शाम को (परीक्षा से ठीक 48 घंटे पहले) एक अनौपचारिक अनुरोध मिला कि छात्र का केंद्र बदलकर नागपुर किया जाए।
- एनटीए के कर्मचारियों ने तुरंत छात्र के पिता से संपर्क किया ताकि वे इस बदलाव की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर सकें।
- एजेंसी ने ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ नीति के तहत छात्र को नागपुर में ही नया केंद्र आवंटित कर दिया।
एनटीए का स्पष्टीकरण: 99.5% छात्रों को मिला मनपसंद शहर
एनटीए ने बताया कि री-शेड्यूल के बाद खुली करेक्शन विंडो का लगभग 3.2 लाख उम्मीदवारों ने लाभ उठाया, जिनमें से 99.5% से अधिक छात्रों को उनकी पहली पसंद का परीक्षा शहर आवंटित किया गया है। एजेंसी ने अपने बयान में कहा, ‘हमारी प्राथमिकता यह है कि किसी भी प्रशासनिक संदेह या भ्रम के कारण कोई भी उम्मीदवार परीक्षा देने से न चूके।’
राजनीतिक हमलों के बाद आया स्पष्टीकरण
इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि जो सिस्टम एक बच्चे को अपने ही शहर में केंद्र नहीं दे सकता, उसे परीक्षा कराने का कोई हक नहीं है। हालांकि, एनटीए ने अपने डिजिटल सबूतों के साथ स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र में बदलाव छात्र के अकाउंट से ही किया गया था, लेकिन छात्र का साल खराब न हो, इसलिए एजेंसी ने तुरंत हस्तक्षेप कर उसे नागपुर में ही नया केंद्र आवंटित किया।