विश्व डेंगू दिवस 2026: मानसून में बुखार के साथ ये लक्षण दिखें तो न करें अनदेखी, डेंगू बन सकता है जानलेवा

देश में मानसून के आगमन के साथ ही मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हर साल हजारों लोग इन बीमारियों की चपेट में आकर अस्पतालों में भर्ती होते हैं, और कई मामलों में मृत्यु भी हो जाती है। डेंगू बुखार इन्हीं गंभीर बीमारियों में से एक है। वर्ष 2025 में भारत में डेंगू के 1,21,824 मामले दर्ज किए गए, जबकि आधिकारिक तौर पर 131 मौतें हुईं। बेहतर निगरानी और एकीकृत वेक्टर प्रबंधन के कारण पिछले वर्षों की तुलना में इन आंकड़ों में कमी आई है। कई राज्यों ने मृत्यु दर को शून्य या बहुत कम रखने में सफलता पाई है।

मानसून की शुरुआत को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ पहले से ही लोगों को सावधान कर रहे हैं। मच्छर जनित इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 15 जून को दुनिया भर में ‘विश्व डेंगू दिवस’ मनाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू से बचाव के उपाय करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही यह समझना भी आवश्यक है कि आखिर यह बीमारी इतनी खतरनाक क्यों मानी जाती है और किन परिस्थितियों में यह जानलेवा हो सकती है।

डेंगू को खतरनाक बनाने वाले कारक

डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू के मामलों में सबसे बड़ा खतरा इसकी पहचान में देरी है। अक्सर लोग डेंगू को सामान्य बुखार समझने की गलती कर बैठते हैं। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी, त्वचा पर लाल चकत्ते और मल में खून आना शामिल हैं।

समय पर बीमारी का पता न चलने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं और शरीर के अंदर रक्तस्राव शुरू हो सकता है। यह स्थिति मरीज को शॉक में ले जा सकती है। यही कारण है कि डॉक्टर डेंगू को हल्के में लेने की सलाह नहीं देते। आइए जानते हैं कि कौन सी चीजें इस बीमारी को और अधिक गंभीर बना देती हैं।

प्लेटलेट्स का गिरना: एक गंभीर संकेत

डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने की बात आपने अक्सर सुनी होगी। प्लेटलेट्स रक्त को जमाने में मदद करती हैं। सामान्यतः इनकी संख्या 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर होती है। डेंगू वायरस बोन मैरो को प्रभावित करके प्लेटलेट्स के उत्पादन को कम कर देता है। जब प्लेटलेट्स बहुत अधिक गिर जाती हैं, तो शरीर में रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है।

  • इस स्थिति में मरीजों की नाक, मसूड़ों से खून आ सकता है या मल में खून दिखाई दे सकता है।
  • शरीर पर बिना किसी चोट के नीले या लाल धब्बे (चोट के निशान) बन सकते हैं।
  • लगातार प्लेटलेट्स गिरने से आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है, जो जानलेवा हो सकता है।

डेंगू हेमोरेजिक फीवर और शॉक सिंड्रोम

डेंगू का एक गंभीर रूप डेंगू हेमोरेजिक फीवर (DHF) कहलाता है। इस स्थिति में रक्त वाहिकाओं की दीवारें कमजोर हो जाती हैं, जिससे शरीर में रक्त और प्लाज्मा का रिसाव शुरू हो सकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं:

  • पेट में तेज दर्द और लगातार उल्टी होना
  • मसूड़ों या नाक से खून आना
  • उल्टी या मल में खून आना
  • थकान, बेचैनी और चिड़चिड़ापन

जब शरीर से प्लाज्मा का अत्यधिक रिसाव होने लगता है, तो रक्तचाप अचानक गिर सकता है। इस स्थिति को डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें:

  • मरीज के हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं
  • नाड़ी कमजोर और तेज चलने लगती है
  • बेहोशी या चेतना में कमी आ सकती है
  • त्वचा चिपचिपी और ठंडी हो जाती है

अन्य जोखिम कारक जो डेंगू को बनाते हैं घातक

दूसरी बार संक्रमण: जिन लोगों को पहले भी डेंगू हो चुका है, उनमें दूसरी बार संक्रमण अधिक गंभीर हो सकता है। ऐसे मामलों में डेंगू हेमोरेजिक फीवर या शॉक सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है।

पहले से मौजूद बीमारियां: मधुमेह, हृदय रोग, किडनी की बीमारी और लिवर की समस्याओं से पीड़ित लोगों में डेंगू का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। इन मरीजों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली: बच्चों और बुजुर्गों की इम्युनिटी कमजोर होती है, जिससे उनमें डेंगू अधिक गंभीर रूप ले सकता है। गर्भवती महिलाओं को भी अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

डिहाइड्रेशन: डेंगू के दौरान तेज बुखार, उल्टी और भूख न लगने के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन से स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे किडनी फेलियर जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।

देरी से पहचान: डेंगू का देर से पता चलना सबसे बड़ा जोखिम है। जब तक लक्षण गंभीर होते हैं, तब तक प्लेटलेट्स काफी गिर चुकी होती हैं और शरीर में रक्तस्राव शुरू हो चुका होता है। ऐसे में जटिलताओं को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।

डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा सबसे जरूरी है। अपने आस-पास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें और पूरी बाजू के कपड़े पहनें। यदि मानसून में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में दर्द या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और डेंगू की जांच कराएं। समय पर पहचान और उचित उपचार से डेंगू को नियंत्रित किया जा सकता है।