नथिंग लाया ‘एसेंशियल एप्स बिल्डर’: बिना कोडिंग के खुद बनाएं अपना एप, शुरू हुआ बीटा रोलआउट
लंदन स्थित स्मार्टफोन निर्माता कंपनी नथिंग ने अपने एआई-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। कार्ल पेई के नेतृत्व वाली इस कंपनी ने ‘एसेंशियल एप्स बिल्डर’ का बीटा संस्करण जारी कर दिया है। यह एक ऐसा उपकरण है जिसकी मदद से लोग बिना कोडिंग सीखे भी अपने मनचाहे एप्लिकेशन बना सकेंगे। कंपनी का दावा है कि यह टूल ‘वाइब कोडिंग’ तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता को केवल सामान्य भाषा में यह बताना होगा कि वह किस तरह का एप चाहता है, और सिस्टम खुद ही उसे तैयार कर देगा। यह टूल नथिंग के प्लेग्राउंड हब का एक हिस्सा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी तकनीकी जानकारी या प्रोग्रामिंग कौशल के, सिर्फ बोलचाल की भाषा में निर्देश देकर अपने लिए कस्टम एप बना सकता है। यह उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है जो एप बनाना तो चाहते हैं, लेकिन कोडिंग नहीं जानते।
क्या है ‘एसेंशियल एप्स बिल्डर’ और ‘वाइब कोडिंग’?
हम अक्सर ऐसे एप्स का इस्तेमाल करते हैं जो लाखों-करोड़ों लोगों के लिए डिजाइन किए गए होते हैं, लेकिन वे हमारी छोटी-मोटी निजी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते। इसी समस्या को हल करने के लिए नथिंग ने एसेंशियल एप्स बिल्डर पेश किया है। यह टूल ‘वाइब-कोडिंग’ तकनीक पर काम करता है। यानी, आपको कोडिंग सीखने या समझने की कोई जरूरत नहीं है। आप बस अपनी आवश्यकता को सामान्य शब्दों में लिखिए, और एआई उसी के अनुसार आपके लिए एक एप या विजेट तैयार कर देता है। फिलहाल, यह टूल लोकेशन-आधारित रिमाइंडर, कैलेंडर एजेंडा और वन-टैप कॉन्टैक्ट विजेट जैसी सुविधाएं बना सकता है। इसका मतलब है कि आप अपनी जरूरत के हिसाब से छोटे-छोटे उपयोगी टूल खुद बना सकते हैं, वो भी बिना कोडिंग की किसी जानकारी के।
कैसे काम करता है ‘एप्स बिल्डर’?
नथिंग का प्लेग्राउंड कंपनी का अपना एप स्टोर जैसा प्लेटफॉर्म है, और इसी के अंदर एप्स बिल्डर दिया गया है। इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है। इसमें आपको बस अपनी जरूरत को सामान्य भाषा में लिखना होता है। इसके बाद एआई आपके लिखे टेक्स्ट को समझकर खुद कोड तैयार करता है और आपके लिए एक विजेट बना देता है। अगर तैयार विजेट आपकी पसंद के अनुसार नहीं है, तो आप एआई से उसमें बदलाव करने के लिए कह सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको कोडिंग की कोई जानकारी होने की आवश्यकता नहीं है। जो विजेट तैयार होता है, उसे आप सीधे अपने फोन पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
किन डिवाइसों पर काम करेगा?
फिलहाल, एसेंशियल एप्स बिल्डर केवल नथिंग फोन 3 पर उपलब्ध है, जिसे जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया था। कंपनी ने इसे एक साथ सभी उपयोगकर्ताओं के लिए जारी नहीं किया है, बल्कि इसे चरणों में रोलआउट किया जा रहा है। इसका उपयोग करने के लिए उपयोगकर्ताओं को पहले वेटलिस्ट में शामिल होना होगा। आगे की योजना के तहत, नथिंग का कहना है कि जल्द ही यह फीचर उन सभी नथिंग और सीएमएफ डिवाइसों पर भी उपलब्ध कराया जाएगा, जो नथिंग ओएस 4.0 पर चलते हैं। कंपनी की कोशिश है कि इस साल के अंत तक इसे सभी उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह लॉन्च कर दिया जाए। उस समय इसमें ‘रिमिक्सिंग एप्स’ जैसा नया फीचर भी जोड़ा जाएगा, जिससे उपयोगकर्ता मौजूदा एप्स में बदलाव कर सकेंगे।
क्या ‘वाइब कोडिंग’ का दौर खत्म हो रहा है?
एक तरफ जहां नथिंग वाइब-कोडिंग को बढ़ावा दे रहा है, वहीं टेक इंडस्ट्री में कुछ अलग ही दिशा देखने को मिल रही है। कई बड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अब ‘एजेंटिक इंजीनियरिंग’ का समय शुरू हो रहा है। एआई विशेषज्ञ आंद्रेज कार्पेथी के अनुसार, अब ध्यान सिर्फ आसान तरीके से कोड लिखवाने पर नहीं है, बल्कि फोकस ऐसे एआई एजेंट्स पर है जो खुद ही पूरा काम संभाल सकें। एजेंटिक इंजीनियरिंग में इंसान खुद कोड नहीं लिखता। वह एक सुपरवाइजर की तरह काम करता है और एआई एजेंट्स को निर्देश देता है। ये एआई एजेंट्स खुद से पूरा कोड तैयार करते हैं और काम पूरा करते हैं। क्लाउड ओपस 4.6 जैसे नए और उन्नत एआई मॉडल इस बदलाव को और तेज बना रहे हैं। यानी, भविष्य में एआई सिर्फ मददगार ही नहीं, बल्कि खुद काम करने वाला ‘डिजिटल असिस्टेंट’ बन सकता है।
किसी ‘खिलौने’ जैसा लगता है टूल
फिलहाल, इस आइडिया के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं, जिसकी वजह से यह एक शक्तिशाली टूल नहीं लगता। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह अभी शुरुआती बीटा चरण में है। फिलहाल, यह फीचर केवल नथिंग फोन 3 पर ही काम करता है और केवल छोटे साइज के विजेट्स (2×2 और 4×2) को सपोर्ट करता है। यानी, इसकी क्षमताएं अभी सीमित हैं। हालांकि, कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में इसमें और फीचर्स जोड़े जाएंगे, जैसे इंटरनेट डेटा का उपयोग, मीडिया लाइब्रेरी तक पहुंच, कैमरा एक्सेस और ब्लूटूथ सपोर्ट। इन अपडेट्स के बाद यह टूल पहले से ज्यादा उपयोगी और मजबूत बन सकता है, लेकिन अभी के लिए यह एक शुरुआती प्रयोग जैसा ही लगता है।
सही प्रॉम्प्ट मिलने पर ही अच्छे परिणाम
जहां तक दूसरी चुनौती की बात है, सबसे बड़ी दिक्कत तकनीक नहीं, बल्कि इंसान खुद है। कई बार उपयोगकर्ता को साफ तौर पर पता ही नहीं होता कि उसे वास्तव में क्या चाहिए। एआई तभी सही और प्रभावी नतीजे देता है जब उसे स्पष्ट और सटीक निर्देश (प्रॉम्प्ट) मिलें। अगर आप अपनी जरूरत ठीक से समझा नहीं पाए, तो परिणाम भी आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं होंगे। वाइब के आधार पर एप बनाना सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन असली उपयोग के लिए सिर्फ वाइब्स काफी नहीं हैं, साफ सोच और स्पष्ट निर्देश भी उतने ही जरूरी हैं।
व्हाट्सएप भी ला रहा है प्रीमियम एआई फीचर्स
सिर्फ नथिंग ही नहीं, बल्कि मेटा भी अपने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। खबर है कि जल्द ही व्हाट्सएप एक पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च कर सकता है। इसमें उपयोगकर्ताओं को खास एआई फीचर्स दिए जाएंगे। इस प्लान के तहत उपयोगकर्ता एआई की मदद से वीडियो बना सकेंगे और उन्हें अपनी पसंद के हिसाब से रीमिक्स भी कर पाएंगे। इसके अलावा, मैनस एआई एजेंट्स जैसे उन्नत टूल्स भी मिल सकते हैं, जो व्यवसाय और काम से जुड़ी जरूरतों को आसान बनाएंगे। साथ ही, कस्टमाइजेशन के लिए नए एप थीम्स, प्रीमियम स्टिकर्स और ज्यादा चैट्स को पिन करने की सुविधा भी दी जा सकती है। यानी, आने वाले समय में व्हाट्सएप सिर्फ एक साधारण चैटिंग एप नहीं रहेगा, बल्कि एआई से जुड़ा एक ज्यादा स्मार्ट और व्यक्तिगत प्लेटफॉर्म बन सकता है।
आने वाले अपडेट्स और नए फीचर्स
फरवरी के अंत तक आने वाले नथिंग ओएस अपडेट के साथ एप्स बिल्डर और ज्यादा शक्तिशाली हो जाएगा। इस अपडेट के बाद इसे कैमरा, माइक्रोफोन, ब्लूटूथ, एक्टिविटी रिकॉग्निशन और सिस्टम वेदर एपीआई जैसे कई महत्वपूर्ण फीचर्स तक पहुंच मिल जाएगी। इन सुविधाओं के जुड़ने से उपयोगकर्ता पहले की तुलना में ज्यादा उन्नत और अपनी जरूरत के मुताबिक एप्स बना सकेंगे। कंपनी की आगे की योजना भी काफी बड़ी है। नथिंग ने वादा किया है कि यह टूल लगातार बेहतर होता रहेगा। फरवरी अपडेट में एक्टिविटी रिकॉग्निशन, सेंसर डेटा और वेदर API का सपोर्ट मिलेगा। साल के अंत तक ‘रिमिक्सिंग एप्स’ जैसा फीचर भी जोड़ा जाएगा, जिससे उपयोगकर्ता पहले से बने एप्स में बदलाव कर सकेंगे। इसके अलावा, भविष्य में इसे कैमरा, माइक्रोफोन, ब्लूटूथ और कॉलिंग जैसी सुविधाओं का पूरा एक्सेस देने की भी तैयारी है। यानी, आने वाले अपडेट्स के बाद एप्स बिल्डर सिर्फ छोटे विजेट्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक ज्यादा उपयोगी और शक्तिशाली टूल बन सकता है।