भारतीय स्मार्टफोन बाजार में बदलाव: सस्ते फोनों का दौर खत्म, प्रीमियम सेगमेंट की ओर बढ़ रहा है रुझान
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब उपभोक्ता सस्ते और बजट फोनों की बजाय महंगे और प्रीमियम डिवाइसों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च के ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह बदलाव सिर्फ ग्राहकों की पसंद का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कंपनियों की मुनाफे पर केंद्रित रणनीति और बढ़ती लागत जैसी गहरी वजहें भी हैं।
प्रीमियम सेगमेंट का उभार
कैलेंडर वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में ₹45,000 से अधिक कीमत वाले अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट ने बाजार में 17 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर है। इस दौरान iPhone 16 सबसे अधिक शिप किया जाने वाला डिवाइस बनकर उभरा, जिसने लगातार तीसरी तिमाही में यह स्थान बरकरार रखा। 2025 की तीसरी तिमाही में ₹30,000 से ऊपर के फोनों की शिपमेंट में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जबकि दूसरी तिमाही में अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट में 37 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई।
बजट फोनों की घटती हिस्सेदारी
आंकड़े बताते हैं कि ₹20,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोनों की वैल्यू हिस्सेदारी 2025 में घटकर केवल 29 प्रतिशत रह गई है, जबकि दो साल पहले यह लगभग 38 प्रतिशत थी। जनवरी 2026 में केवल 13 नए बजट मॉडल लॉन्च हुए, जबकि पिछले वर्षों में यह संख्या 19 के करीब रहती थी। ओप्पो, वीवो और रेडमी जैसे ब्रांडों ने भी ₹15,000 से कम वाले सेगमेंट में अपनी सक्रियता कम कर दी है। 2026 तक ₹10,000 से कम वाले फोनों की शिपमेंट हिस्सेदारी गिरकर 12-13 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है।
बजट फोन की मांग कम होने के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव सिर्फ ग्राहकों की बढ़ती महंगाई सहनशीलता का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ ठोस व्यावसायिक कारण भी हैं:
- पार्ट्स की बढ़ती कीमतें: स्मार्टफोन बनाने में उपयोग होने वाले प्रमुख घटकों जैसे मेमोरी (RAM) और डिस्प्ले के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। IDC के अनुसार, 2026 तक वैश्विक स्तर पर स्मार्टफोन की औसत कीमत (ASP) 14 प्रतिशत तक बढ़कर लगभग $523 (करीब ₹43,000) हो सकती है।
- मुनाफे पर फोकस: कंपनियां अब केवल बिक्री बढ़ाने की बजाय मुनाफे पर ध्यान दे रही हैं। सस्ते फोनों में मार्जिन बहुत कम होता है, इसलिए ओईएम (OEM) अब किफायती फोनों की तुलना में महंगे फोन लॉन्च करना अधिक लाभदायक मान रहे हैं।
- बदलती सप्लाई रणनीति: लावा इंटरनेशनल के प्रोडक्ट हेड सुमित सिंह के अनुसार, प्रीमियमीकरण केवल मांग में बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी बिजनेस स्ट्रैटेजी है। लागत बढ़ने के कारण कंपनियां अब उच्च मूल्य वाले सेगमेंट में अपना पोर्टफोलियो बढ़ा रही हैं।
फ्लैगशिप किलर्स का नया दौर
अब असली मुकाबला ₹25,000 से ₹60,000 के ‘फ्लैगशिप किलर’ सेगमेंट में होगा। चीनी कंपनियां इस मिड-रेंज मार्केट को निशाना बना रही हैं, जबकि एपल और सैमसंग ₹60,000 से ऊपर के प्रीमियम टियर पर अपनी पकड़ मजबूत किए हुए हैं। यह बदलाव साफ संकेत देता है कि भारतीय स्मार्टफोन बाजार अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां गुणवत्ता और प्रीमियम अनुभव की मांग लगातार बढ़ रही है।