एंथ्रोपिक का नया एआई टूल: आईटी सेक्टर में हड़कंप, एक दिन में उड़े लाखों करोड़

भारतीय शेयर बाजार बुधवार को हरे निशान पर बंद होने में सफल रहा, लेकिन आईटी क्षेत्र के लिए यह दिन बेहद निराशाजनक रहा। इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचसीएल और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 5 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की खबरों के बाद इन शेयरों में तेजी देखी गई थी, लेकिन बुधवार को माहौल पूरी तरह बदल गया। यह गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि अमेरिकी बाजारों में भी टेक शेयरों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस अचानक आए तूफान की वजह एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल बताया जा रहा है।

वह एआई टूल जिसने मचाई खलबली

अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक, जो अब तक ओपनएआई के चैटजीपीटी और गूगल के जेमिनी के मुकाबले कम चर्चित थी, लंबे समय से अपने क्लॉड चैटबॉट पर काम कर रही है। इसी साल जनवरी में कंपनी ने ‘क्लॉड को-वर्क’ नाम से एक नया एजेंटिक एआई असिस्टेंट लॉन्च किया। यह टूल खासतौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं। यह एआई असिस्टेंट फाइलों को पढ़ने, दस्तावेज तैयार करने और जटिल, बहु-चरणीय कार्यों को पूरा करने में सक्षम है।

क्लॉड को-वर्क की सबसे बड़ी खासियत है इसमें प्लग-इन जोड़ने की सुविधा। एंथ्रोपिक ने 30 जनवरी 2026 को इसके लिए 11 ओपन-सोर्स प्लग-इन जारी किए। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता अपनी जरूरत के अनुसार एआई में नए कौशल, जानकारियां, कमांड या सब-एजेंट जोड़ सकते हैं। इससे क्लॉड किसी विशेष भूमिका, टीम या कंपनी के लिए एक विशेषज्ञ की तरह काम करने लगता है।

उदाहरण के लिए, एक कानूनी प्लग-इन के जरिए यह एआई अनुबंधों की समीक्षा, गैर-प्रकटीकरण समझौतों की जांच और कानूनी ब्रीफिंग तैयार करने जैसे काम मिनटों में कर सकता है। इसके अलावा, बिक्री, विपणन, वित्त, डेटा विश्लेषण, ग्राहक सेवा और जीव विज्ञान अनुसंधान के लिए भी अलग-अलग प्लग-इन उपलब्ध हैं। अपनी एजेंटिक क्षमताओं के कारण यह टूल सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काम की योजना बना सकता है, उसे अंजाम दे सकता है और उसकी समीक्षा भी कर सकता है।

चैटजीपीटी और अन्य टूल्स से कैसे अलग है यह?

एंथ्रोपिक के इस टूल को एआई जगत में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसे विश्लेषकों ने ‘SaaSpocalypse’ (सैप्सोकैलिप्स) का नाम दिया है। आम जनरेटिव एआई टूल (जैसे चैटजीपीटी) इंसानों के निर्देशों पर काम करते हैं और उन्हें बार-बार निर्देश देने की जरूरत होती है। इसके विपरीत, एजेंटिक एआई को एक निश्चित लक्ष्य दिया जाता है और वह अपनी स्वतंत्र क्षमता से बिना हर कदम पर निर्देश लिए, उस लक्ष्य तक पहुंचने का प्रयास करता है। सीधे शब्दों में, यह एआई खुद योजना बनाता है, उसका विश्लेषण करता है और लक्ष्य तक पहुंचता है।

क्लॉड को-वर्क की क्षमताएं

वर्कफ्लो पर नियंत्रण: दुनियाभर की एआई कंपनियां अब तक सिर्फ मॉडल बेचती थीं, जिन पर दूसरी कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर विकसित करती थीं। लेकिन एंथ्रोपिक अब सीधे समाधान (सॉल्यूशन) दे रहा है। यानी उसका एआई टूल निर्देशों के आधार पर कंपनी के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर खुद बना रहा है। इससे वह उन सॉफ्टवेयर कंपनियों और उनमें काम करने वाले लोगों के लिए सीधा खतरा बन गया है, जो एआई मॉडल का इस्तेमाल कर सॉफ्टवेयर बनाने का काम करते हैं।

सॉफ्टवेयर को बदलने की क्षमता: यह टूल अपने उपयोगकर्ता की जरूरत के हिसाब से सॉफ्टवेयर को अपग्रेड या बदल सकता है। इसका मतलब है कि जो कंपनियां अब तक सॉफ्टवेयर को सुधारने या उसकी कोडिंग बदलने का काम करती थीं, उनकी जरूरत भी खत्म हो सकती है। इसमें सेल्सफोर्स या सर्विसनाउ जैसे पारंपरिक प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।

दुनियाभर में हलचल क्यों?

‘SaaSpocalypse’ शब्द बाजार विश्लेषकों द्वारा दिया गया है, जो सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) कंपनियों के शेयरों में आई भारी गिरावट और उनके अस्तित्व पर मंडराते खतरे को दर्शाता है। यह स्थिति तब पैदा हुई जब निवेशकों को लगा कि ये नए एआई टूल अब सॉफ्टवेयर कंपनियों की मदद करने के बजाय सीधे उन्हें बदलने लगे हैं।

बाजार में मची खलबली का सबसे बड़ा कारण एंथ्रोपिक का लीगल ऑटोमेशन प्लग-इन रहा। यह प्लग-इन जटिल कानूनी कार्यों को मिनटों में कर सकता है, जिससे निवेशकों में यह डर बैठ गया कि पारंपरिक कानूनी और प्रशासनिक सॉफ्टवेयर सेवाओं की मांग खत्म हो जाएगी। क्लॉड के नए एजेंट अब सीधे कार्यों को अंतिम पड़ाव तक पहुंचा सकते हैं, जिससे पारंपरिक इंटरफेस की जरूरत कम हो सकती है। ये एआई टूल डेटा प्रोसेसिंग और ग्राहक सहायता जैसे कार्यों को ऑटोमेट कर रहे हैं, जिनके जरिए भारतीय आईटी कंपनियां और वैश्विक सॉफ्टवेयर फर्में राजस्व कमाती रही हैं।

शेयर बाजार पर पड़ा असर

अमेरिका में सिर्फ एक कारोबारी सत्र में सॉफ्टवेयर, लीगल टेक और वित्तीय सेवा शेयरों की वैल्यू से लगभग 285 से 300 अरब डॉलर साफ हो गए। प्रमुख कंपनियों में थॉमसन रॉयटर्स के शेयरों में 15%, लीगलजूम में 20% और सेल्सफोर्स में लगभग 7% की गिरावट दर्ज की गई। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, टैरिफ की घोषणा के बाद आई गिरावट को छोड़ दें, तो यह सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में आई सबसे बड़ी गिरावट थी।

इसका असर भारतीय आईटी क्षेत्र पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया। इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 5% से 8% तक की गिरावट आई। यूरोप और ब्रिटेन के बाजार भी इससे अछूते नहीं रहे। ब्रिटेन के पब्लिशिंग ग्रुप पीयरसन के शेयर लगभग 8%, सेज सॉफ्टवेयर कंपनी के 10% और लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप के शेयरों में 12% से अधिक की गिरावट देखी गई। एम्सटर्डम स्थित डच सॉफ्टवेयर कंपनी वोल्टर्स क्लूवर के शेयरों में भी 13% की गिरावट आई।

को-वर्क क्यों बना खतरा, आगे क्या?

बाजार में बनी रहेगी अस्थिरता: विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में मची यह खलबली जल्द शांत होने वाली नहीं है। फिलहाल अस्थिरता बनी रहेगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह गिरावट केवल भावनाओं पर आधारित प्रतिक्रिया हो सकती है और बाजार छोटी अवधि में एआई के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर देख रहा है।

रोजगार और कार्यबल पर प्रभाव: एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने चेतावनी दी है कि एआई अब उन ‘व्हाइट-कॉलर’ नौकरियों को प्रभावित कर रहा है जिन्हें अब तक सुरक्षित माना जाता था। उनका अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में तकनीक, वित्त और कानून जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण नौकरियां कम हो सकती हैं।