व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर: सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर मेटा ने दिया विस्तृत जवाब

व्हाट्सएप द्वारा लाया जा रहा यूजरनेम फीचर अभी लॉन्च होने से पहले ही चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गया है। इस फीचर के जरिए यूजर्स अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना सिर्फ यूजरनेम के आधार पर एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। कंपनी का दावा है कि इससे निजता को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन केंद्र सरकार और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इससे फर्जी पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी की आशंका जताई है। ऐसे में मेटा ने इन चिंताओं पर स्पष्टीकरण देते हुए फीचर की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से बताया है।

क्या है यूजरनेम फीचर और इसकी उपयोगिता?

व्हाट्सएप का यह नया फीचर यूजर्स को एक अनोखा यूजरनेम चुनने की सुविधा देगा। इसके बाद कोई भी व्यक्ति आपके मोबाइल नंबर को जाने बिना सिर्फ यूजरनेम के जरिए आपको मैसेज भेज सकेगा। कंपनी के मुताबिक, यह कदम यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस फीचर को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इसका इस्तेमाल फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जाएगा।

मेटा ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर क्या कहा?

मेटा ने अपने आधिकारिक FAQ में साफ किया है कि सोशल मीडिया पर फैल रही वे अफवाहें बिल्कुल गलत हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति किसी मशहूर हस्ती या सरकारी संस्था का नाम यूजरनेम के तौर पर पहले से रिजर्व कर सकता है। कंपनी के अनुसार, ऐसे यूजरनेम केवल उनके असली मालिकों यानी संबंधित सेलिब्रिटी, सरकारी एजेंसी या मेटा वेरिफाइड अकाउंट धारकों के लिए ही सुरक्षित रखे जाएंगे।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजरनेम फीचर पूरी तरह वैकल्पिक होगा। यूजर्स चाहें तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर बिना यूजरनेम के भी व्हाट्सएप का उपयोग जारी रख सकते हैं। अगर कोई अपनी पसंद का यूजरनेम नहीं ले पाता है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है कि वह यूजरनेम पहले से किसी इंस्टाग्राम या फेसबुक अकाउंट से जुड़ा हो, या फिर वह किसी मशहूर हस्ती या संस्था के लिए रिजर्व हो। ऐसे में यूजरनेम जनरेटर अपने आप वैकल्पिक नाम सुझाएगा।

फर्जी पहचान और स्कैम से कैसे मिलेगी सुरक्षा?

यह सवाल सबसे अहम है कि अगर कोई आपके जैसा यूजरनेम बनाकर आपकी पहचान चुराने की कोशिश करे तो क्या होगा? मेटा ने इसके लिए कई सुरक्षा उपाय बताए हैं। फिलहाल यूजरनेम के जरिए मैसेजिंग की सुविधा शुरू नहीं हुई है। जब यह फीचर लॉन्च होगा, तो कोई नया व्यक्ति यूजरनेम के जरिए संपर्क करेगा तो व्हाट्सएप उसके देश की जानकारी दिखाएगा और पहली बार संपर्क होने पर चेतावनी भी जारी करेगा। इसके अलावा, मशहूर लोगों के नाम और उनसे मिलते-जुलते यूजरनेम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे। कंपनी ब्लॉक और रिपोर्ट सिस्टम के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी।

एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अगर किसी को आपका यूजरनेम पता चल जाए तो क्या वह आपको बिना अनुमति के मैसेज कर सकता है? मेटा ने इसका जवाब ‘नहीं’ में दिया है। जिस तरह व्हाट्सएप पर मोबाइल नंबर को सर्च नहीं किया जा सकता, उसी तरह यूजरनेम को भी सर्च नहीं किया जा सकेगा। सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए यूजर यूजरनेम की भी जोड़ सकेंगे, जिससे किसी को संपर्क करने के लिए यूजरनेम के साथ-साथ उस की की भी जरूरत होगी। अनजान लोगों के मैसेज पर पहले की तरह चेतावनी, ब्लॉक और रिपोर्ट की सुविधा भी जारी रहेगी।

यूजरनेम की क्या है और इसकी उपयोगिता?

यूजरनेम की एक अतिरिक्त सुरक्षा परत है। इसे चालू करने पर कोई भी नया व्यक्ति आपसे संपर्क करने के लिए आपका यूजरनेम और उसकी की दोनों जानने के बाद ही मैसेज भेज पाएगा। जरूरत पड़ने पर यूजर किसी भी समय अपनी की बदल सकते हैं। यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगी जो अपनी पहचान को और अधिक सुरक्षित रखना चाहते हैं।

क्या इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट लिंक करना जरूरी होगा?

मेटा ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई यूजर वही यूजरनेम चाहता है जो उसके इंस्टाग्राम या फेसबुक अकाउंट पर है, तो उसे दोनों अकाउंट लिंक करने होंगे। इससे फर्जी पहचान बनाने में मुश्किल होगी। हालांकि, इसके बाद यूजर चाहें तो अकाउंट अनलिंक कर सकते हैं या व्हाट्सएप के लिए अलग यूजरनेम चुन सकते हैं। यूजरनेम को बाद में बदलने की भी सुविधा होगी, बशर्ते नया यूजरनेम उपलब्ध हो।

अफवाहों पर मेटा का स्पष्टीकरण

कंपनी ने एक बार फिर दोहराया है कि सोशल मीडिया पर मशहूर या चर्चित यूजरनेम रिजर्व करने के जो दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से गलत हैं। केवल संबंधित सार्वजनिक हस्ती या असली अकाउंट मालिक ही ऐसे यूजरनेम पर दावा कर सकते हैं। मेटा ने यह भी बताया कि इस साल के आखिर में फीचर लॉन्च होने से पहले ही रिजर्वेशन शुरू कर दिया गया है, ताकि यूजर्स अपनी पसंद का यूजरनेम सुरक्षित कर सकें। कंपनी इस दौरान लगातार यूजर्स का फीडबैक ले रही है, ताकि आधिकारिक रोलआउट के समय फीचर बेहतर और सुरक्षित अनुभव दे सके।

सरकार ने क्यों जताई चिंता?

केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर मेटा को नोटिस भेजा है। सरकार का मानना है कि अगर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए, तो यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और फर्जी पहचान बनाकर ठगी जैसे मामलों को बढ़ावा दे सकता है। सरकार ने मेटा से जवाब मांगा है कि इस फीचर के कारण साइबर अपराध बढ़ने की स्थिति में कंपनी की जिम्मेदारी कैसे तय होगी। साथ ही, बातचीत पूरी होने तक भारत में इस फीचर को लॉन्च नहीं करने के लिए भी कहा गया है।

बहस क्यों बढ़ी?

हाल ही में कई चर्चित लोगों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनके नाम या उनसे मिलते-जुलते कई यूजरनेम पहले से ही रिजर्व हो चुके हैं। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और MobiKwik के सीईओ विपिन प्रीत सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए थे। इसके बाद इस फीचर को लेकर बहस और तेज हो गई।

यूजर्स की सुरक्षा के लिए क्या होंगे इंतजाम?

मेटा का कहना है कि यूजरनेम फीचर में कई सुरक्षा परतें होंगी। किसी यूजर से संपर्क करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा। कंपनी बार-बार यूजरनेम का अनुमान लगाने की कोशिशों को ब्लॉक करेगी और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने वाले सिस्टम भी सक्रिय रहेंगे। इसके अलावा, जब कोई अनजान व्यक्ति पहली बार यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजेगा, तब व्हाट्सएप यह जानकारी भी दिखाएगा कि वह नया अकाउंट है या नहीं, क्या वह आपके कॉन्टैक्ट में है, क्या कोई कॉमन ग्रुप है और वह किस देश से मैसेज भेज रहा है। इससे यूजर तय कर सकेगा कि जवाब देना है या नहीं।

क्या अभी फीचर शुरू हो गया है?

नहीं, व्हाट्सएप ने साफ किया है कि यूजरनेम फीचर अभी उपलब्ध नहीं है। कंपनी इसे इस साल के आखिर तक चरणबद्ध तरीके से रोलआउट करेगी। व्हाट्सएप का कहना है कि फीचर इस्तेमाल करने के बावजूद अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत बनी रहेगी।

सरकार के नोटिस पर IFF की प्रतिक्रिया

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने सरकार के नोटिस पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि किसी नए डिजिटल फीचर को लॉन्च होने से पहले रोकने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए। IFF के मुताबिक, मौजूदा कानून सरकार को किसी फीचर को पहले से मंजूरी देने या उसे रोकने का अधिकार स्पष्ट रूप से नहीं देते।