व्हाट्सएप ने 9,400 से अधिक खातों पर लगाई रोक: कंबोडिया से जुड़ा डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट

मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 9,400 से अधिक खातों को बैन कर दिया है। यह कार्रवाई जनवरी 2026 से शुरू हुए 12 सप्ताह के एक विशेष अभियान के तहत की गई, जिसकी शुरुआत महज 17 संदिग्ध खातों की जांच से हुई थी। इस जांच में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।

कैसे खुला ठगों का पूरा जाल?

जांच के दौरान कंपनी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग किया। इसके जरिए संदिग्ध ग्रुप्स, बार-बार इस्तेमाल होने वाली तस्वीरों और वीडियो, तथा एक समान व्यवहार वाले खातों को ट्रैक किया गया। फर्जी पुलिस लोगो और सीबीआई या दिल्ली पुलिस जैसी एजेंसियों के नाम पर लोगों को डराने वाले खातों की पहचान की गई। ये स्कैमर्स आम लोगों को घंटों वीडियो या ऑडियो कॉल पर उलझाए रखते थे और फर्जी कानूनी दस्तावेज दिखाकर उन्हें डराते थे।

विदेशी धरती पर बैठे थे ठग

जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से कई स्कैम ऑपरेशन दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों, खासकर कंबोडिया से संचालित हो रहे थे। इससे साफ हो गया है कि यह सिर्फ देश के अंदर का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क है। ठगों का तरीका बेहद डरावना होता है, जिसमें पीड़ितों को मानसिक दबाव में रखा जाता है और उन्हें अपने परिवार से भी संपर्क नहीं करने दिया जाता।

स्कैम में 471 प्रतिशत का भयावह इजाफा

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में डिजिटल अरेस्ट स्कैम से होने वाला नुकसान 471 प्रतिशत बढ़कर 1,935 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा इस ठगी के बढ़ते खतरे को दर्शाता है। इन जालसाजों द्वारा लंबी कॉल्स और फर्जी केस का डर दिखाकर लोगों को इस कदर डराया जाता है कि वे अपनी जीवनभर की कमाई उनके खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कार्रवाई

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में स्वतः संज्ञान लिया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व में एक रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक, दूरसंचार विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। इस साइबर खतरे से निपटने के लिए सरकार अब बायोमेट्रिक सिम वेरिफिकेशन और तेज सिम ब्लॉकिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। दूरसंचार विभाग दिसंबर 2026 तक इस सिस्टम को लागू करना चाहता है, जिससे संदिग्ध सिम को घंटों के भीतर ही ब्लॉक किया जा सकेगा।