कलकत्ता हाईकोर्ट का WBSSC को निर्देश: 1806 दागी अभ्यर्थियों की विस्तृत सूची प्रस्तुत करने का आदेश
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने आयोग से कहा है कि वह उन 1,806 दागी उम्मीदवारों की पूरी और विस्तृत जानकारी के साथ एक नई रिपोर्ट अदालत में पेश करे। यह कार्रवाई इसलिए की गई है ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और किसी भी दोषी उम्मीदवार को भविष्य की नियुक्तियों में शामिल होने से रोका जा सके।
ये 1,806 उम्मीदवार उस बड़े समूह का हिस्सा हैं, जिनमें कुल 25,753 अभ्यर्थी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में इन सभी की नियुक्तियों को भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के कारण रद्द कर दिया था। अब हाईकोर्ट चाहता है कि इन दागी उम्मीदवारों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक विवरण उपलब्ध कराए जाएं।
अदालत ने मौजूदा रिपोर्ट को क्यों माना अपर्याप्त?
न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने आयोग द्वारा पहले प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट किया कि यह सूची दागी उम्मीदवारों की सही पहचान के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत के अनुसार, प्रस्तुत सूची में कई महत्वपूर्ण जानकारियां गायब हैं, जो उम्मीदवारों की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए आवश्यक हैं।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रत्येक उम्मीदवार किस श्रेणी या कारण से दागी पाया गया है। सूची में उम्मीदवारों का रोल नंबर, नाम, विषय, माता-पिता का नाम और जन्म तिथि तो दर्ज है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि वे किस प्रकार की अनियमितता में शामिल थे। अदालत ने इसे एक गंभीर कमी बताया, जिसके बिना किसी भी उम्मीदवार की वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, अदालत ने यह भी पाया कि सूची में यह उल्लेख नहीं है कि संबंधित उम्मीदवार की नियुक्ति 2016 में आयोजित पहले स्कूल लेवल सेलेक्शन टेस्ट (SLST) के तहत किस स्कूल और किस जिले में हुई थी। यह जानकारी भी दागी उम्मीदवारों की पहचान को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दागी उम्मीदवारों की पहचान को लेकर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने अपने आदेश में कहा कि यदि दागी उम्मीदवारों से संबंधित पूरी और स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि कुछ उम्मीदवार जांच के दायरे से बाहर रह सकते हैं। ऐसे में वे आगामी भर्ती प्रक्रियाओं में भाग ले सकते हैं, जो न्याय के हित में नहीं होगा।
अदालत ने यह भी याद दिलाया कि 19 नवंबर 2025 को दिए गए अपने पिछले आदेश में पहले ही स्पष्ट कहा गया था कि दागी उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करने का उद्देश्य केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि उनकी स्पष्ट और निर्विवाद पहचान सुनिश्चित करना है।
आयोग की दलील और आगे की कार्यवाही
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे दागी उम्मीदवारों से जुड़ी अतिरिक्त और विस्तृत जानकारी के साथ एक नई सूची प्रकाशित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयोग इस मामले में अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उल्लेखनीय है कि WBSSC वर्तमान में पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर नियुक्तियों के लिए दूसरे स्कूल लेवल सेलेक्शन टेस्ट (SLST) 2025 के माध्यम से एक नई भर्ती प्रक्रिया संचालित कर रहा है। इस पृष्ठभूमि में, दागी उम्मीदवारों की सही पहचान करना और उन्हें भविष्य की भर्तियों से बाहर रखना अदालत के लिए प्राथमिकता है।
हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह ऐसी विस्तृत सूची प्रस्तुत करे जिसमें सभी प्रासंगिक विवरण शामिल हों, ताकि किसी भी प्रकार की अस्पष्टता न रहे। इस मामले में अगली सुनवाई 11 फरवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत आयोग द्वारा प्रस्तुत नई रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।