हाई ब्लड प्रेशर: आम मिथक और वैज्ञानिक सच्चाई, जानिए क्यों बढ़ता है बीपी और क्या करें
हाई ब्लड प्रेशर, जिसे हाइपरटेंशन भी कहा जाता है, को ‘साइलेंट किलर’ की संज्ञा दी गई है। यह स्थिति धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती जाती है और अक्सर इसका पता तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो जाती है। खास बात यह है कि अब यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि युवा वर्ग में भी तेजी से फैल रही है। हृदय रोग और हार्ट अटैक के प्रमुख कारणों में से एक माने जाने वाले हाई बीपी के बारे में सही जानकारी का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत धारणाएं आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर के कई कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवंशिकता, उम्र का बढ़ना, मोटापा, मानसिक तनाव, शारीरिक सुस्ती, अत्यधिक नमक का सेवन, धूम्रपान, शराब का सेवन और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं। दुनिया भर में करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से अधिकांश लोग या तो अपनी बीमारी से अनजान हैं या फिर इससे जुड़े कई भ्रमों में फंसे हुए हैं। गलत जानकारी के कारण कई मरीज समय पर जांच नहीं कराते या डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं लेना बंद कर देते हैं, जो बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। आइए, हाई बीपी से जुड़े कुछ आम मिथकों और उनके पीछे की वैज्ञानिक सच्चाई को समझते हैं।
मिथ: हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ बुजुर्गों को होता है
यह एक बहुत ही आम गलतफहमी है कि हाई ब्लड प्रेशर केवल बढ़ती उम्र की बीमारी है। हालांकि, आज के समय में युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं।
- बदलती जीवनशैली, अत्यधिक तनाव, मोटापा, फास्ट फूड का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं में भी हाइपरटेंशन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
- यदि आपके परिवार में पहले से किसी को हाई बीपी की समस्या रही है, तो आपमें इस बीमारी का खतरा और भी बढ़ जाता है, चाहे आपकी उम्र कितनी भी हो।
- इसलिए, उम्र के आधार पर इस बीमारी को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। किसी भी उम्र में नियमित बीपी जांच जरूरी है।
मिथ: शुरुआत में लक्षण दिखने से बीमारी की पहचान हो सकती है
हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहने का सबसे बड़ा कारण यही है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते।
- अधिकांश लोगों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं होते, जिससे उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनका बीपी बढ़ा हुआ है।
- कई मरीजों में इसका पता तब चलता है जब वे किसी अन्य बीमारी की नियमित जांच कराते हैं या फिर तब जब हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी की बीमारी जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ चुकी होती हैं।
- हालांकि, कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर आना, धुंधला दिखना या सांस फूलने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं, लेकिन इन लक्षणों का न होना इस बात की गारंटी नहीं है कि ब्लड प्रेशर सामान्य है।
मिथ: बीपी सामान्य होने पर दवा बंद कर देनी चाहिए
यह एक बहुत ही खतरनाक मिथक है। ब्लड प्रेशर की दवाएं बीमारी को पूरी तरह से खत्म नहीं करतीं, बल्कि उसे नियंत्रित रखने में मदद करती हैं।
- दवा के नियमित सेवन से बीपी सामान्य रहता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना इसे बंद करने पर ब्लड प्रेशर फिर से बढ़ सकता है।
- दवा बंद करने से अचानक बीपी बढ़ने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है।
- कुछ मामलों में, यदि जीवनशैली में बहुत बड़ा बदलाव आता है (जैसे वजन कम होना और नियमित व्यायाम), तो डॉक्टर दवा की मात्रा कम कर सकते हैं या बंद करने की सलाह दे सकते हैं। यह निर्णय केवल एक डॉक्टर ही ले सकता है, खुद से नहीं।
मिथ: नमक कम खाने से हाई बीपी नहीं होगा
यह सच है कि अधिक नमक का सेवन हाई ब्लड प्रेशर का एक बड़ा कारण है, लेकिन यह इकलौता कारण नहीं है।
- आनुवंशिकता, मोटापा, मानसिक तनाव, किडनी की बीमारी, शारीरिक निष्क्रियता और हार्मोन संबंधी विकार भी बीपी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
- सिर्फ नमक कम करने से ही बीपी नियंत्रित हो जाए, यह जरूरी नहीं है। इसके लिए समग्र जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।
- इसके अलावा, कई पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों (जैसे चिप्स, सॉस, फ्रोजन फूड) में छिपा हुआ सोडियम काफी मात्रा में होता है, जो बीपी बढ़ाने का काम करता है। इसलिए, सिर्फ खाने में नमक कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि छिपे हुए सोडियम से भी सावधान रहना जरूरी है।
नोट: यह लेख चिकित्सा रिपोर्टों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।