उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का सिविल सेवकों को संबोधन, नागरिक-केंद्रित शासन पर जोर

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मंगलवार को 18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सिविल सेवकों को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर वे समावेशी विकास और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालेंगे। कार्यक्रम का विषय “विकसित भारत: नागरिक-केंद्रित शासन और अंतिम छोर तक विकास” रखा गया है, जो सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

कार्यक्रम की रूपरेखा और मुख्य सत्र

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से होगी, जिसमें केंद्रीय राज्य मंत्री जीतेन्द्र सिंह अपना संबोधन देंगे। कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन स्वागत भाषण प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद “सिविल सेवाओं की भूमिका और प्रभावशीलता” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी। इस चर्चा में सरकार, उद्योग जगत और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और सरकारी सेवाओं को सरल बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श करेंगे।

सिविल सेवा दिवस का महत्व

हर वर्ष मनाया जाने वाला सिविल सेवा दिवस देश के सिविल सेवकों को जनता की सेवा के प्रति अपने समर्पण को नवीनीकृत करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिन उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी और उत्कृष्टता के साथ करने के लिए प्रेरित करता है। इस दिन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1947 में इसी दिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए सिविल सेवकों को देश का “इस्पात ढांचा” बताया था। यह दिन सिविल सेवकों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका की याद दिलाता है।

विशेष सत्र और चर्चा के विषय

इस कार्यक्रम में कई विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी, नीति विशेषज्ञ और अन्य हितधारक मिलकर यह सुनिश्चित करने पर चर्चा करेंगे कि सरकारी सेवाएं आम नागरिकों तक अधिक सुलभ और प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकें। ‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना से संबंधित सत्र की अध्यक्षता जीतन राम मांझी करेंगे। वहीं, गैर-संचारी बीमारियों की रोकथाम और उपचार पर केंद्रित एक अन्य सत्र की अध्यक्षता जगत प्रकाश नड्डा करेंगे, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा होगी।

यह आयोजन न केवल सिविल सेवकों को प्रेरित करने का माध्यम है, बल्कि यह शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।