वट सावित्री व्रत 2026: शनैश्चर अमावस्या के दुर्लभ संयोग में मनाया जाएगा यह व्रत

ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत सभी महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष यह व्रत 16 मई 2026 को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ रखा जाएगा। इस बार वट सावित्री व्रत पर शनैश्चर अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष एवं धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार, व्रत, पर्व और त्योहारों की परंपरा हमारे प्राचीन ज्ञान-विज्ञान संपन्न ऋषि-महर्षियों एवं पूर्वज विद्वानों द्वारा स्थापित की गई है। ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत सभी सौभाग्यवती महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह व्रत संपूर्ण भारतवर्ष में महिलाएं पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ करती हैं। विधि-विधानपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से पति को दीर्घायु, सुख-समृद्धि तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है। उत्तर भारत में इसे बरगदाही के नाम से भी जाना जाता है। सनातन संस्कृति के उत्कृष्ट जीवन मूल्यों के परिचायक इस व्रत से जुड़ी सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा से प्रायः हर सनातनधर्मी भली भांति परिचित है।

वट सावित्री व्रत 2026 तिथि

हिन्दू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 मिनट से शुरू हो रही है और यह देर रात 1:30 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के मुताबिक 16 मई 2026 को ज्येष्ठ अमावस्या मान्य होगी और उसी दिन वट सावित्री व्रत का पर्व मनाया जाएगा।

शुभ मुहूर्त

वट सावित्री पूजन का शुभ मुहूर्त प्रातः 07 बजकर 05 मिनट से दोपहर 1 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में पूजा-अर्चना करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

वट सावित्री व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष की पूजा और व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वटवृक्ष वातावरण को शीतलता व शुद्धता प्रदान करता है और आध्यात्मिक दृष्टि से भी यह अत्यंत लाभकारी है।

वट सावित्री व्रत के रूप में वटवृक्ष की पूजा का यह विधान भारतीय संस्कृति की गौरव-गरिमा का एक प्रतीक है। इसके द्वारा वृक्षों के औषधीय महत्व और उनके देवस्वरूप का भी ज्ञान होता है।

वट सावित्री व्रत के शुभ संयोग

इस बार शनि अमावस्या पर एक साथ पांच शुभ संयोग बन रहे हैं:

  • ज्येष्ठ अमावस्या
  • शनि जयंती
  • वट सावित्री व्रत
  • सौभाग्य योग
  • शोभन योग

सुबह से 10:26 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा, जो जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है। इसके बाद शोभन योग प्रारंभ होगा और शुभ कार्यों के लिए उत्तम समय प्रदान करेगा। ये सभी योग मिलकर इस दिन को अत्यंत फलदायी बनाते हैं।

यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं है।