वैश्विक एआई रैंकिंग 2026: अमेरिका शीर्ष पर, भारत छठे स्थान पर
दिल्ली में आयोजित ‘एआई इंपैक्ट समिट 2026’ के बाद एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दुनिया भर के देशों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षमता का आकलन किया गया है। इस रिपोर्ट में 100 से अधिक देशों का मूल्यांकन किया गया है, जिसमें अमेरिका ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि भारत छठे स्थान पर रहा है। यह मूल्यांकन एआई अनुसंधान, बुनियादी ढांचे, प्रतिभा, शिक्षा, सरकारी नीतियों और अर्थव्यवस्था में एआई के उपयोग जैसे विभिन्न पहलुओं पर आधारित है।
एआई दौड़ में अमेरिका का दबदबा
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 100 में से 82 अंक प्राप्त करके शीर्ष पर है। अमेरिका की मजबूती उसके उन्नत अनुसंधान, मजबूत तकनीकी बुनियादी ढांचे और एआई को उद्योगों में व्यापक रूप से अपनाने में निहित है। देश में एआई का उपयोग व्यवसायों और उद्योगों में तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उसे एक महत्वपूर्ण बढ़त मिली है।
चीन और सिंगापुर का प्रदर्शन
चीन 59 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। चीन में एआई शिक्षा और अनुसंधान पर बड़ा जोर दिया जा रहा है, जहां 107 शीर्ष एआई विश्वविद्यालय बड़ी संख्या में विशेषज्ञ तैयार कर रहे हैं। वहीं, सिंगापुर 37 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। सिंगापुर में एआई विश्वविद्यालयों की संख्या कम है, लेकिन उनकी गुणवत्ता बेहतरीन है। इसके अलावा, वहां की प्रतिभा और शिक्षा का स्तर भी काफी मजबूत है।
दक्षिण कोरिया और यूके की स्थिति
इस सूची में दक्षिण कोरिया चौथे और यूनाइटेड किंगडम (यूके) पांचवें स्थान पर हैं। दोनों देशों ने एआई तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
भारत का स्थान और संभावनाएं
भारत इस रिपोर्ट में 32 अंकों के साथ छठे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रतिभा है। देश में बड़ी संख्या में कुशल इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद हैं। हालांकि, भारत बुनियादी ढांचे और सरकारी नीतियों के मामले में अभी पीछे है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि इन क्षेत्रों में सुधार किया जाए, तो भारत एआई की दौड़ में और आगे बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
- जो देश एआई अनुसंधान, बुनियादी ढांचे, शिक्षा और नीतियों को एक साथ मजबूत करते हैं, वे ही एआई में आगे निकलते हैं।
- सिर्फ प्रतिभा या अनुसंधान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक मजबूत और समग्र प्रणाली का होना आवश्यक है।
- एआई का भविष्य तकनीक, रोजगार और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाला है, इसलिए इस क्षेत्र में आगे रहना हर देश के लिए अनिवार्य हो गया है।
भारत के लिए अवसर
भारत के पास विशाल युवा आबादी और मजबूत तकनीकी प्रतिभा है। यदि देश एआई बुनियादी ढांचे और अनुसंधान में अधिक निवेश करता है, तो वह भविष्य में एआई के क्षेत्र में और बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। यह रिपोर्ट भारत के लिए एक संकेत है कि उसे अपनी क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक एआई दौड़ में अपनी स्थिति सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।