यूपीएससी के नोटिस में 40 से अधिक वर्तनी त्रुटियां, गुणवत्ता जांच पर उठे सवाल

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है, लेकिन यह नोटिस परीक्षा से ज्यादा अपनी त्रुटियों के कारण चर्चा में है। अभ्यर्थियों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस दस्तावेज में 40 से अधिक वर्तनी, व्याकरण और वाक्य संरचना संबंधी गलतियां पाई हैं। इस घटनाक्रम ने आयोग की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नोटिफिकेशन में पाई गई प्रमुख गलतियां

अभ्यर्थियों ने नोटिफिकेशन के विभिन्न पृष्ठों पर कई स्पष्ट त्रुटियां चिन्हित की हैं। ‘Examination’ शब्द को कई स्थानों पर ‘Examinaiton’ लिखा गया है, जो ‘How to Apply’ अनुभाग में भी दिखाई दिया। इसी प्रकार, ‘Candidates’ शब्द चार अलग-अलग जगहों पर ‘Cadidates’ के रूप में लिखा गया है। हैरानी की बात यह है कि इन गलतियों के ठीक बगल में सही वर्तनी भी मौजूद है, जो प्रूफरीडिंग में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

अन्य उल्लेखनीय गलतियों में शामिल हैं:

  • पृष्ठ 7 पर ‘Benchmark’ को ‘Bechmark’ लिखा गया
  • पृष्ठ 8 पर ‘List of Abbreviations’ की जगह ‘List of Abbriviations’ दर्ज किया गया
  • पृष्ठ 9 पर ‘Kolkata’ की वर्तनी एक स्थान पर ‘KOLKATTA’ लिखी गई
  • पृष्ठ 67 पर ‘agro-based industries’ को ‘ago-based industries’ और ‘Public Sector Undertaking’ को ‘public sector underkings’ लिखा गया
  • अंतिम पृष्ठ पर ‘BEYOND’ शब्द ‘BEYND’ के रूप में प्रकट हुआ

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं और सवाल

इन त्रुटियों ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। कई उपयोगकर्ताओं ने तर्क दिया है कि यदि उम्मीदवार अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में ऐसी गलतियां करते हैं, तो उनके अंक काटे जा सकते हैं। ऐसे में आयोग के आधिकारिक दस्तावेज में इतनी त्रुटियां होना अत्यंत चिंताजनक है। कई लोगों ने स्क्रीनशॉट साझा करके गुणवत्ता नियंत्रण की कमी पर सवाल उठाए हैं।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि UPSC एक संवैधानिक संस्था है जो देश के प्रशासनिक तंत्र के लिए अधिकारियों का चयन करती है। सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चुने गए उम्मीदवार जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और राजनयिक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज में बुनियादी गलतियां आयोग की पेशेवर छवि को प्रभावित कर सकती हैं और बेहतर प्रूफरीडिंग की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

आवेदन प्रक्रिया और रिक्तियां

विवाद के बावजूद, सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 24 फरवरी 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस वर्ष सिविल सेवा परीक्षा के लिए 933 और भारतीय वन सेवा परीक्षा के लिए 80 रिक्तियां घोषित की गई हैं।

हर साल लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं। वर्ष 2025 में 10 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 4,161 प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए, 2,736 साक्षात्कार तक पहुंचे और अंततः 979 उम्मीदवारों का चयन हुआ। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आवेदन करने की उम्मीद है।

गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल

यह घटना आयोग की आंतरिक समीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाती है। एक संवैधानिक संस्था से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने आधिकारिक दस्तावेजों में उच्चतम स्तर की सटीकता बनाए रखे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की त्रुटियां न केवल आयोग की विश्वसनीयता को कम करती हैं, बल्कि उम्मीदवारों के बीच भ्रम भी पैदा कर सकती हैं।

अभ्यर्थियों ने मांग की है कि आयोग त्रुटियों को सुधारने के लिए एक संशोधित नोटिफिकेशन जारी करे और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए एक मजबूत गुणवत्ता जांच प्रक्रिया लागू करे। यह मामला सरकारी संस्थानों में प्रूफरीडिंग और दस्तावेज़ समीक्षा के महत्व को भी उजागर करता है।