उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में वर्दी अनिवार्य करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं सभी राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों के लिए वर्दी (यूनिफॉर्म) अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जन भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
शिक्षकों की जवाबदेही और शैक्षणिक अनुशासन पर जोर
राज्यपाल ने बैठक में शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों को अपने पेशे की गरिमा और सम्मान बनाए रखना चाहिए और ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जिससे शिक्षण पेशे की छवि धूमिल हो। उन्होंने शिक्षकों को समय पर कक्षाएं लेने और छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। राज्यपाल का मानना था कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
छात्राओं के लिए कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर बल
आनंदीबेन पटेल ने महिला छात्रावासों की व्यवस्था को बेहतर बनाने और छात्राओं को नकारात्मक सामाजिक प्रभावों से बचाने पर जोर दिया। उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में रोजगारोन्मुखी कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया। राज्यपाल ने कहा कि ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, मेहंदी कला, जीएसटी, बिंदी निर्माण, लेखांकन और बाजरे से खाद्य पदार्थ तैयार करने जैसे कोर्स छात्राओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। इससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी।
जैविक खेती और राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रचार
राज्यपाल ने छात्रों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों के पास जमीन है तो वे जैविक खेती करके अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से कहा कि छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता दी जाए और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। राज्यपाल का मानना था कि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ योग, चित्रकला और अन्य उपयोगी कौशलों की जानकारी भी मिलनी चाहिए, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि हो सके।
शिक्षकों की कमी से निपटने और ऑनलाइन शिक्षा के उपाय
आनंदीबेन पटेल ने उन कॉलेजों में जहां शिक्षकों की कमी है, ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था लागू करने की बात कही। उन्होंने अन्य संस्थानों से सहयोग लेकर पढ़ाई जारी रखने का सुझाव भी दिया। साथ ही उन्होंने रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने और शिक्षकों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए।
बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छ पेयजल पर विशेष ध्यान
राज्यपाल ने आंगनवाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और कॉलेजों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने गुजरात की तर्ज पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल अपनाकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का सुझाव दिया।
दुर्लभ पुस्तकों का डिजिटलीकरण और शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच
राज्यपाल ने बताया कि ज्ञान भारतम अभियान के तहत पांडुलिपियों, भोजपत्रों और दुर्लभ पुस्तकों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का काम किया जा रहा है। इस कार्य के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को नोडल संस्था बनाया गया है। उन्होंने सभी कॉलेजों को इन्फ्लिबनेट और “वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन” योजना का अधिक से अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए, ताकि छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की किताबों, शोध पत्रों और शैक्षणिक सामग्री तक बेहतर पहुंच मिल सके।
शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की पहल
राज्यपाल ने “यूपी सर्टिफिकेशन” पहल के तहत कॉलेजों से गुणवत्ता सुधार, बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सरकार को भेजने को कहा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी जागरूकता बढ़ाने के लिए “विलेज साइंटिस्ट प्रोग्राम” लागू करने का भी सुझाव दिया गया। बैठक के अंत में राज्यपाल ने सभी शिक्षकों को हर साल कम से कम दो पुस्तक अध्याय या शोध पत्र प्रकाशित करने के निर्देश दिए, ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध और अकादमिक लेखन की संस्कृति को मजबूत किया जा सके।