यूपी बोर्ड की नई पहल: 9वीं से 12वीं तक सस्ती एनसीईआरटी किताबें अब घर बैठे उपलब्ध

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक बड़ी घोषणा की है। बोर्ड ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को किफायती दरों पर एनसीईआरटी आधारित पुस्तकें उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ऑनलाइन होम डिलीवरी की सुविधा भी दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य राज्य भर के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री को सरल और सुलभ बनाना है।

36 विषयों की 70 पुस्तकें होंगी शामिल

बोर्ड द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस योजना में कक्षा 9 और 10 के लिए हिंदी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और संस्कृत जैसे प्रमुख विषयों की पुस्तकें रखी गई हैं। वहीं, कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए अंग्रेजी, भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखांकन और गृह विज्ञान सहित अनेक विषयों की किताबें उपलब्ध होंगी। कुल मिलाकर 36 विषयों की लगभग 70 पुस्तकों को इस योजना में शामिल किया गया है।

तीन अधिकृत प्रकाशकों को सौंपी गई जिम्मेदारी

पुस्तकों के मुद्रण और वितरण को सुव्यवस्थित करने के लिए बोर्ड ने तीन प्रकाशकों और वितरकों को अधिकृत किया है। इनकी जिम्मेदारी अलग-अलग कक्षाओं के लिए तय की गई है। विवरण इस प्रकार है:

  • मेसर्स पायनियर, प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स, आगरा: कक्षा 9वीं और 12वीं
  • मेसर्स पीतांबरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड, बिजौली, झांसी: कक्षा 10वीं
  • मेसर्स सिंघल एजेंसीज, लखनऊ: कक्षा 11वीं

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से मिलेंगी किताबें

बोर्ड ने पुस्तकों की खरीदारी को आसान बनाने के लिए कई विकल्प उपलब्ध कराए हैं। छात्र फरवरी 2026 से अपने नजदीकी स्थानीय दुकानों और थोक विक्रेताओं से किताबें खरीद सकेंगे। साथ ही, ऑनलाइन माध्यम से भी पुस्तकें मंगाने की सुविधा दी गई है। इसके लिए बोर्ड ने प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है। खास बात यह है कि ऑनलाइन होम डिलीवरी के लिए छात्रों से कोई अतिरिक्त डिलीवरी शुल्क नहीं लिया जाएगा।

यह पहल न केवल छात्रों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराएगी, बल्कि उन्हें घर बैठे किताबें मंगाने की सुविधा भी देगी। इससे विशेष रूप से दूरदराज के इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है। यूपी बोर्ड का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल और भौतिक संसाधनों को एक साथ लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।