यूपी बोर्ड ने इंटर प्रैक्टिकल परीक्षा की अंतिम तिथि बढ़ाई, 13 फरवरी तक अंक अपलोड करने के सख्त आदेश
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) ने इंटरमीडिएट प्रैक्टिकल परीक्षा 2026 के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बोर्ड ने प्रैक्टिकल परीक्षाओं और अंकों के ऑनलाइन अपलोड की समय सीमा को बढ़ाकर 13 फरवरी 2026 कर दिया है। यह कदम छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि कई विद्यालयों में प्रैक्टिकल प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई थी और अंक अपलोड लंबित थे।
पहले की समय सीमा और वर्तमान स्थिति
बोर्ड द्वारा पहले जारी कार्यक्रम के अनुसार, प्रैक्टिकल परीक्षाएं दो चरणों में आयोजित की जानी थीं। पहला चरण 24 जनवरी से 1 फरवरी तक और दूसरा चरण 2 फरवरी से 9 फरवरी तक निर्धारित था। हालांकि, समीक्षा के दौरान बोर्ड को जानकारी मिली कि अभी भी कई स्कूलों में प्रैक्टिकल परीक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं। साथ ही, कुछ विद्यालयों ने अपने छात्रों के प्राप्तांक बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं किए हैं। इन्हीं कारणों से बोर्ड ने समय सीमा में संशोधन करने का निर्णय लिया है।
बोर्ड के सख्त निर्देश
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने सभी परीक्षकों और स्कूल प्रधानाचार्यों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी लंबित प्रैक्टिकल परीक्षाएं नई समय सीमा 13 फरवरी तक पूरी कर ली जाएं। इसके साथ ही, सभी छात्रों के अंकों को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर इसी तिथि तक अनिवार्य रूप से अपलोड करना सुनिश्चित किया जाए।
बोर्ड ने इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है। निर्देशों में साफ कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर अंक अपलोड नहीं किए गए और इसके कारण किसी भी छात्र का परिणाम प्रभावित होता है, तो संबंधित परीक्षक, विद्यालय के प्रधानाचार्य और जिला विद्यालय निरीक्षक को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- यूपी बोर्ड ने इंटरमीडिएट प्रैक्टिकल परीक्षा 2026 की अंतिम तिथि 13 फरवरी कर दी है।
- यह निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है, क्योंकि कई स्कूलों में प्रैक्टिकल और मार्क्स अपलोड अधूरे थे।
- पहले चरण की परीक्षा 24 जनवरी से 1 फरवरी और दूसरे चरण की परीक्षा 2 से 9 फरवरी तक निर्धारित थी।
- सभी परीक्षकों और प्रधानाचार्यों को 13 फरवरी तक 100% अंक अपलोड करने का आदेश दिया गया है।
- लापरवाही से किसी छात्र के परिणाम पर असर पड़ने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
बोर्ड का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी छात्रों का परिणाम समय पर और बिना किसी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा के घोषित किया जा सके। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।