यूजीसी का निर्देश: 30 जून तक अपलोड करें यूजी-पीजी छात्रों का रिकॉर्ड, संशोधन निर्धारित मानकों पर ही संभव
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने राज्यों को स्पष्ट कहा है कि स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों का शैक्षणिक डेटा 30 जून तक अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाना चाहिए। यूजीसी की सचिव प्रो. श्यामा रथ ने इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र लिखकर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए हैं।
इस पत्र में उल्लेख किया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 से जुड़े सभी छात्रों की मार्कशीट, ग्रेडशीट और संबंधित क्रेडिट स्कोर को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना अनिवार्य है। यह डेटा परीक्षा वर्ष 2025 से संबंधित होना चाहिए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 30 जून के बाद यह अपलोड विंडो बंद कर दी जाएगी, जिसके बाद प्लेटफॉर्म पर कोई भी नया रिकॉर्ड स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संशोधन की प्रक्रिया सीमित
यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्थान द्वारा पहले से अपलोड किए गए रिकॉर्ड में कोई सुधार या संशोधन करना आवश्यक हो, तो वह केवल निर्धारित मानकों और एबीसी की नियत प्रक्रियाओं के तहत ही किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि बिना किसी औपचारिकता के डेटा में बदलाव संभव नहीं होगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक डेटा की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य
यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उठाया गया है, जो एकीकृत और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों में आजीवन सीखने की आदत को विकसित करना है। इसके तहत विद्यार्थी अपने मुख्य पाठ्यक्रम के अलावा किसी भी समय अपनी रुचि के अन्य विषयों का अध्ययन कर सकते हैं।
- इस प्रणाली में छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों को क्रेडिट में परिवर्तित किया जाता है।
- इन क्रेडिट को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) में सुरक्षित रखा जाता है।
- इससे छात्रों को अपनी शैक्षणिक यात्रा में लचीलापन मिलता है और वे अपनी सुविधानुसार विभिन्न विषयों का ज्ञान अर्जित कर सकते हैं।
यूजीसी ने सभी क्रेडिट प्रदान करने वाले संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे इस समय सीमा का पालन करना सुनिश्चित करें, ताकि शैक्षणिक डेटा का सुचारू और व्यवस्थित रखरखाव हो सके। यह कदम उच्च शिक्षा प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।