ट्राई और ट्रूकॉलर के बीच स्पैम कॉल्स को लेकर नया विवाद: 140 और 1600 सीरीज के नंबर क्यों बने मुद्दा?
देश में बढ़ते स्पैम कॉल्स के बीच टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) और लोकप्रिय कॉलर आइडेंटिफिकेशन ऐप ट्रूकॉलर के बीच एक नया तकरार सामने आया है। यह विवाद 140 और 1600 सीरीज से शुरू होने वाले टेलीफोन नंबरों को लेकर है। ट्राई का कहना है कि इन नंबरों को व्हाइटलिस्ट किया गया है, लेकिन ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स इन्हें गलत तरीके से स्पैम बता रहे हैं। वहीं, ट्रूकॉलर का दावा है कि यूजर्स खुद बड़ी संख्या में इन कॉल्स को ब्लॉक कर रहे हैं। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
140 और 1600 सीरीज के नंबर क्या हैं?
भारत सरकार और दूरसंचार नियामक ने विशेष उद्देश्यों के लिए कुछ नंबर सीरीज तय की हैं:
- 140 सीरीज: यह सीरीज मुख्य रूप से कंपनियों द्वारा प्रमोशनल और मार्केटिंग कॉल्स के लिए उपयोग की जाती है।
- 1600 सीरीज: यह सीरीज बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा सेवा और लेन-देन से संबंधित कॉल्स के लिए आरक्षित है।
नियमों के अनुसार, इन नंबरों को व्हाइटलिस्ट किया गया है, जिसका मतलब है कि कोई भी कॉलर आईडी ऐप इन्हें अपने स्तर पर स्पैम या ब्लॉक नहीं कर सकता।
विवाद की जड़ क्या है?
हालांकि ये नंबर व्हाइटलिस्टेड हैं, लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब लाखों यूजर्स ने इन कॉल्स से परेशान होकर इन्हें मैन्युअली स्पैम रिपोर्ट करना शुरू कर दिया। ट्रूकॉलर के सिस्टम में यूजर्स की रिपोर्ट के आधार पर ऑटोमैटिक स्पैम टैगिंग की सुविधा है। इसके अलावा, प्रीमियम यूजर्स के पास पूरी नंबर सीरीज को ब्लॉक करने का विकल्प भी है।
ट्राई ने इस पर आपत्ति जताई है। रेगुलेटर का कहना है कि ये ऐप्स वैध कमर्शियल कम्युनिकेशन को स्पैम बताकर ब्लॉक कर रहे हैं, जो नियमों का उल्लंघन है। ट्राई ने सरकार से आईटी एक्ट के तहत इन ऐप्स पर कार्रवाई करने का अधिकार मांगा था।
ट्रूकॉलर का जवाब और यूजर्स का गुस्सा
इस मामले में ट्रूकॉलर के सीईओ ऋषित झुनझुनवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखी। उन्होंने ट्राई की इस कोशिश को अनुचित बताया। उनके अनुसार, ट्रूकॉलर ने ट्राई के निर्देशों का पालन करते हुए शुरुआत में इन नंबरों को व्हाइटलिस्ट किया था, लेकिन इसका नतीजा उल्टा रहा।
कंपनी ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं:
- रोजाना इन दोनों सीरीज से आने वाली 5.1 करोड़ से अधिक कॉल्स को यूजर्स अनदेखा कर देते हैं।
- पिछले 8 महीनों में 140 सीरीज की 81% और 1600 सीरीज की 79% कॉल्स को यूजर्स ने नजरअंदाज किया है।
- अक्टूबर 2025 से 1600 सीरीज के नंबरों को मैन्युअली ब्लॉक करने के मामलों में 208% की वृद्धि हुई है।
झुनझुनवाला ने यह भी बताया कि जब यूजर्स लगातार इन कॉल्स को स्पैम रिपोर्ट कर रहे थे, तब ट्रूकॉलर को नियमों के कारण यूजर्स को यह बताने से रोका गया था कि ये कॉल्स स्पैम हैं।
क्या ट्राई इन ऐप्स पर कार्रवाई कर सकता है?
मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत ट्राई के पास ट्रूकॉलर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। इसका कारण यह है कि जियो, एयरटेल जैसे टेलीकॉम ऑपरेटर दूरसंचार विभाग के लाइसेंस के तहत काम करते हैं और उन्हें ट्राई के नियम मानने होते हैं। वहीं, ट्रूकॉलर एक डिजिटल मध्यस्थ है जो आईटी एक्ट के दायरे में आता है। इसलिए ट्राई सीधे तौर पर इन ऐप्स के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठा सकता।
यूजर्स के लिए इसका क्या मतलब है?
यह विवाद साफ करता है कि भले ही सरकार ने कुछ नंबरों को वैध घोषित किया हो, लेकिन यूजर्स का भरोसा इन कॉल्स पर से उठ चुका है। अगर कंपनियां और बैंक अपनी कॉल्स को अधिक प्रासंगिक और कम परेशान करने वाला नहीं बनाते, तो यूजर्स इन्हें ब्लॉक करते रहेंगे। ट्रूकॉलर और ट्राई के बीच यह लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, जिसका सीधा असर आम लोगों के फोन पर आने वाली कॉल्स पर पड़ेगा।