फरवरी 2026 में टेलीकॉम सेक्टर: ग्राहक बढ़े, लेकिन वृद्धि दर में आई मंदी

दूरसंचार नियामक (TRAI) द्वारा जारी फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय टेलीकॉम बाजार में मोबाइल उपयोगकर्ताओं की संख्या में इजाफा तो हुआ है, लेकिन यह वृद्धि पिछले महीने की तुलना में कुछ धीमी रही। फरवरी में कुल 64 लाख नए मोबाइल ग्राहक जुड़े, जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 67 लाख था। यह दर्शाता है कि बाजार में नए ग्राहकों को जोड़ने की गति में हल्की कमी आई है।

एयरटेल ने मारी बाजी, जियो की रफ्तार सुस्त

इस महीने सबसे अधिक नए ग्राहक जोड़ने का रिकॉर्ड भारती एयरटेल के नाम रहा। कंपनी ने फरवरी में 48.6 लाख नए उपयोगकर्ताओं को अपने नेटवर्क से जोड़ा, जो जनवरी के 44 लाख के आंकड़े से अधिक है। दूसरी ओर, रिलायंस जियो की वृद्धि दर में कमी देखी गई। जियो ने फरवरी में केवल 16.2 लाख नए ग्राहक जोड़े, जो पिछले महीनों की तुलना में काफी कम है।

वोडाफोन आइडिया की वापसी, बीएसएनएल को झटका

वोडाफोन आइडिया (Vi) ने फरवरी में सकारात्मक प्रदर्शन किया। कंपनी ने 21,927 नए ग्राहक जोड़े, जबकि जनवरी में उसे 4.11 लाख ग्राहकों का नुकसान हुआ था। यह कंपनी के लिए एक राहत भरी खबर है। इसके विपरीत, सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। फरवरी में बीएसएनएल के 1.01 लाख ग्राहक कम हो गए, जो कंपनी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

ग्राहकों का रुझान: नेटवर्क बदलने की होड़ जारी

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) के आंकड़े बताते हैं कि उपयोगकर्ता अभी भी बेहतर सेवा और किफायती प्लान की तलाश में ऑपरेटर बदल रहे हैं। फरवरी में MNP के तहत 1.44 करोड़ अनुरोध दर्ज किए गए, जो दर्शाता है कि ग्राहकों में अपने मौजूदा नेटवर्क से संतुष्ट न होने की प्रवृत्ति बनी हुई है।

कुल ग्राहक आधार और ब्रॉडबैंड विस्तार

  • देश में कुल वायरलेस उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़कर 127.33 करोड़ हो गई है, जिसमें मासिक वृद्धि 0.55% दर्ज की गई।
  • सक्रिय वायरलेस ग्राहकों की संख्या 117.76 करोड़ रही।
  • ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या में भी 0.60% की वृद्धि हुई है, जो अब बढ़कर 105.90 करोड़ हो गई है।

शहरी क्षेत्रों का दबदबा और निजी कंपनियों की बढ़त

टेलीकॉम सेक्टर में शहरी इलाकों का वर्चस्व बरकरार है। कुल वायरलेस ग्राहकों में 57% से अधिक हिस्सा शहरों का है। वहीं, निजी दूरसंचार कंपनियों का बाजार में दबदबा लगातार बढ़ रहा है। इनका कुल बाजार हिस्सा 92.59% तक पहुंच गया है, जो सरकारी क्षेत्र की कंपनियों के लिए एक चुनौती है।