ट्राई का नया AI सिस्टम: बिना शिकायत के भी बंद हो सकता है स्पैम कॉल करने वाला नंबर
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) स्पैम और फ्रॉड कॉल्स के खिलाफ एक सख्त और पूरी तरह से ऑटोमेटेड सिस्टम लाने जा रहा है। अब तक किसी नंबर को ब्लॉक करने के लिए उपयोगकर्ता की शिकायत जरूरी थी, लेकिन नए प्रस्ताव के तहत यह जिम्मेदारी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सौंपी जाएगी। AI खुद ही संदिग्ध गतिविधियों को पहचानकर कार्रवाई करेगा, जिससे शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
ट्राई के प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अब कार्रवाई का आधार उपयोगकर्ता की शिकायत नहीं, बल्कि AI एल्गोरिथम होगा। यह सिस्टम लगातार निगरानी रखेगा और कॉलिंग पैटर्न का विश्लेषण करेगा।
- लगातार फ्लैगिंग: अगर टेलीकॉम कंपनियों का AI सिस्टम किसी नंबर को लगातार 10 दिनों तक संभावित स्पैम के रूप में चिह्नित करता है, तो बिना किसी औपचारिक शिकायत के उस नंबर को डिस्कनेक्ट किया जा सकता है।
- रीयल-टाइम विश्लेषण: AI यह देखेगा कि एक नंबर से कितनी बार कॉल की जा रही है, कॉल की अवधि क्या है, और उनका पैटर्न क्या है। असामान्य गतिविधियों को तुरंत फ्लैग किया जाएगा।
बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
वर्तमान में दूरसंचार कंपनियां हर महीने करीब 30 से 40 करोड़ कॉल्स को संदिग्ध मानती हैं, लेकिन उनके खिलाफ मिलने वाली शिकायतों की संख्या कुछ हजारों में ही होती है। यह बड़ा अंतर स्पैम और फ्रॉड कॉल्स पर प्रभावी कार्रवाई में बाधा बन रहा था। इसी अंतर को पाटने के लिए ट्राई ने AI-आधारित ऑटोमेटेड सिस्टम लागू करने का फैसला किया है।
मौजूदा और नए नियमों में अंतर
- कार्रवाई का आधार: पहले 10 दिनों में कम से कम 5 शिकायतें जरूरी थीं, अब लगातार 10 दिन AI फ्लैगिंग ही काफी होगी।
- उपयोगकर्ता की भूमिका: पहले शिकायत करना अनिवार्य था, अब बिना शिकायत के भी ऑटो-एक्शन संभव होगा।
- नतीजा: पहले जांच के बाद कार्रवाई होती थी, अब नंबर का तत्काल डिस्कनेक्शन संभव होगा।
गिग वर्कर्स पर क्या होगा असर?
इस सख्त नियम से कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। डिलीवरी एजेंट्स, कैब ड्राइवर्स और फ्रीलांसर्स जैसे गिग वर्कर्स एक दिन में कई बार कॉल कर सकते हैं। ऐसे में AI उनके कॉलिंग पैटर्न को स्पैम समझ सकता है। इस चिंता को दूर करने के लिए ट्राई फिलहाल स्टेकहोल्डर्स से चर्चा कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तविक उपयोगकर्ताओं के नंबर सुरक्षित रहें।
गौरतलब है कि एयरटेल जैसे कुछ ऑपरेटर पहले ही बड़े पैमाने पर AI फिल्टर्स का उपयोग कर रहे हैं और उन्होंने अरबों स्पैम कॉल्स को फ्लैग किया है। अब ट्राई इसे कानूनी रूप से और सख्त बनाकर अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स यानी 10-डिजिट वाले नंबरों पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की तैयारी में है।