तेजपुर विश्वविद्यालय संकट: कुलपति अवकाश पर, जांच समिति गठित

तेजपुर विश्वविद्यालय में लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने कड़ा कदम उठाते हुए कुलपति शंभू नाथ सिंह को तत्काल प्रभाव से अवकाश पर भेज दिया है। मंत्रालय ने उनके खिलाफ लगे विभिन्न आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का भी गठन किया है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा था।

क्या हैं कुलपति पर आरोप?

कुलपति शंभू नाथ सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं और कई मामलों में मनमानी का रवैया अपनाया गया। इसके अलावा, छात्रों से दुर्व्यवहार और परिसर में पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने के भी आरोप शामिल हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि कुलपति के कार्यकाल में वनों की कटाई हुई और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा, जिससे विश्वविद्यालय समुदाय में गहरा आक्रोश है।

जांच समिति का गठन और समयसीमा

शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कुलपति को जांच पूरी होने तक सभी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग रहना होगा। तीन सदस्यीय जांच समिति को विश्वविद्यालय में चल रहे हालात, कुलपति पर लगे आरोपों और उनसे जुड़े सभी मामलों की विस्तृत जांच करनी है। समिति को अधिकतम तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

सितंबर से जारी आंदोलन

तेजपुर विश्वविद्यालय में सितंबर 2025 के मध्य से ही छात्र, शिक्षक और कर्मचारी कुलपति के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने अपने आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर 24 घंटे का भूख हड़ताल भी किया। यह आंदोलन लगातार बढ़ता गया और विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाने लगा।

छात्रों से टकराव और बिगड़े हालात

22 सितंबर को विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब कुलपति और छात्रों के बीच तीखी बहस हुई। यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कुलपति को मौके से हटना पड़ा और उसके बाद उन्होंने परिसर आना बंद कर दिया। इस घटना ने प्रदर्शन को और हवा दी।

छात्रों का यह भी आरोप है कि प्रसिद्ध सांस्कृतिक हस्ती जुबीन गर्ग के निधन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने उचित सम्मान नहीं दिखाया। इस घटना ने असंतोष को और बढ़ा दिया और आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।

प्रशासनिक संकट और अधिकारियों का इस्तीफा

प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 11 फैकल्टी सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं या विश्वविद्यालय छोड़ चुके हैं। इसे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक संकट के रूप में देखा जा रहा है। लगातार पद छोड़ने वाले अधिकारियों ने प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर कर दिया है।

अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था

प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रखने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने आईआईटी गुवाहाटी के डिजाइन विभाग के प्रोफेसर अमरेंद्र कुमार दास को तेजपुर विश्वविद्यालय का प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति अस्थायी रूप से की गई है, ताकि विश्वविद्यालय के नियमित कामकाज प्रभावित न हों।

यह मामला देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।