टेलीग्राम पर लगा प्रतिबंध हटा, लेकिन कुछ पाबंदियां बरकरार
भारत में लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लगभग एक सप्ताह बाद फिर से बहाल कर दिया गया है। सरकार द्वारा लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध 22 जून की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया, जिसके बाद गूगल ने मंगलवार सुबह अपने प्ले स्टोर पर इस एप को दोबारा उपलब्ध करा दिया। हालांकि, कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए यह प्लेटफॉर्म पहले से ही सीमित रूप में काम कर रहा था, लेकिन अब आधिकारिक तौर पर सभी के लिए इसकी पहुंच खुल गई है।
दिलचस्प बात यह है कि एप्पल के एप स्टोर पर यह एप मंगलवार सुबह 10 बजे तक उपलब्ध नहीं था। एप्पल की ओर से इस संबंध में कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्यों लगाया गया था प्रतिबंध?
सरकार ने 16 जून 2026 को टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। इसका मुख्य कारण नीट परीक्षा से जुड़ी गतिविधियां थीं। आरोप था कि टेलीग्राम पर फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक सूचनाएं और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली धोखाधड़ी को रोकने में प्लेटफॉर्म विफल रहा।
सरकारी अधिकारियों ने 3 जून को टेलीग्राम के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अपनी चिंताओं को साझा किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने एप, उसके वेब वर्जन और संबंधित लिंक को 22 जून तक ब्लॉक करने का आदेश जारी कर दिया था।
मैसेज एडिटिंग फीचर पर अब भी रोक
हालांकि टेलीग्राम को पूरी तरह राहत नहीं मिली है। प्लेटफॉर्म के मैसेज एडिटिंग फीचर पर अभी भी प्रतिबंध जारी है। सरकार ने टेलीग्राम को निर्देश दिया है कि वह 30 जून तक इस सुविधा को बंद रखे। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने तक इस फीचर पर निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या सूचना में हेरफेर को रोका जा सके।
नीट री-एग्जाम के बाद राहत
नीट की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की गई थी। खास बात यह है कि इस बार परीक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या पेपर लीक की कोई नई शिकायत सामने नहीं आई है। इसी कारण सरकार ने टेलीग्राम पर लगे अस्थायी प्रतिबंध को बढ़ाने का फैसला नहीं लिया और इसे अपने आप समाप्त होने दिया गया।
सीईओ पावेल डुरोव ने जताई नाराजगी
प्रतिबंध के दौरान टेलीग्राम के सीईओ पावेल डुरोव ने भारत सरकार के फैसले की खुले तौर पर आलोचना की थी। उनका कहना था कि कुछ उपयोगकर्ताओं द्वारा कथित रूप से लीक सामग्री साझा करने के कारण पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टेलीग्राम के प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म्स ने कंपनी के खिलाफ लॉबिंग की हो सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर सरकारों और टेक कंपनियों के बीच बढ़ते दबाव को दर्शाता है। यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में टेलीग्राम और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी सूचना, परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी और अवैध कंटेंट को रोकने के लिए और सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।
फिलहाल, टेलीग्राम के भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि प्लेटफॉर्म वापस आ गया है, लेकिन उन्हें कुछ समय के लिए मैसेज एडिटिंग जैसी सुविधाओं के बिना काम चलाना होगा।