जेम्स वेब टेलीस्कोप: अंतरिक्ष का वह कैमरा जिसने खोजा ‘लाल आलू’ रहस्य
अंतरिक्ष की गहराइयों में एक अनोखी आकाशगंगा मिली है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘रेड पोटैटो’ यानी लाल आलू का नाम दिया है। यह खोज जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने की है। लाल रंग की यह आकाशगंगा अपने विशाल आकार और अजीबोगरीब व्यवहार के कारण खगोलविदों को हैरान कर रही है। आइए समझते हैं कि यह टेलीस्कोप क्या है और इसने कैसे इस रहस्यमयी आकाशगंगा का पता लगाया।
क्या है ‘लाल आलू’ आकाशगंगा?
यूनिवर्सिटी ऑफ मिलान के खगोलविदों की एक टीम ने जेम्स वेब टेलीस्कोप के जरिए इस विशाल आकाशगंगा की खोज की। इसका रंग और बनावट आलू जैसी दिखती है, इसलिए इसे ‘रेड पोटैटो’ कहा जा रहा है। यह पृथ्वी से अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। इसका आधिकारिक नाम MQN01 J004131.9-493704 है।
यह आकाशगंगा हमारे सूर्य से लगभग 110 अरब गुना अधिक भारी है। इतनी विशाल होने के बावजूद, इसके आसपास तारों को जन्म देने वाली गैस का विशाल भंडार होने के बावजूद, यहां नए तारों का निर्माण लगभग ठप हो गया है। आमतौर पर ऐसी बड़ी आकाशगंगाएं हर साल सैकड़ों नए तारे बनाती हैं, लेकिन ‘लाल आलू’ में यह प्रक्रिया बेहद धीमी है।
पड़ोसी आकाशगंगा का शोर
जांच में पता चला कि इस आकाशगंगा के पास एक और आकाशगंगा मौजूद है, जो बहुत शक्तिशाली एक्स-रे किरणें (X-ray jets) उत्सर्जित कर रही है। ये किरणें आसपास की गैस को इतना अशांत कर देती हैं कि ‘लाल आलू’ उस गैस का उपयोग नहीं कर पाती। सीधे शब्दों में कहें तो पड़ोसी के इस शोर-शराबे ने इस विशाल आकाशगंगा की तारा निर्माण प्रक्रिया को पूरी तरह से रोक दिया है।
जेम्स वेब टेलीस्कोप (JWST) क्या है?
जेम्स वेब टेलीस्कोप को पुराने हो चुके हबल टेलीस्कोप के उत्तराधिकारी के रूप में विकसित किया गया था। इसे अंतरिक्ष में स्थापित दुनिया का सबसे शक्तिशाली कैमरा माना जा सकता है। इसे 25 दिसंबर 2021 को लॉन्च किया गया था। नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी जैसी संस्थाओं ने इसे बनाने में अरबों डॉलर का निवेश किया है।
यह टेलीस्कोप इन्फ्रारेड तकनीक पर काम करता है, जिसे ‘हीट विजन’ भी कहा जाता है। जिस तरह अंधेरे में देखने वाले इन्फ्रारेड चश्मे गर्मी को पहचान लेते हैं, उसी तरह यह टेलीस्कोप धूल और धुएं के पीछे छिपे तारों और आकाशगंगाओं को देख सकता है।
सोने की परत वाला आईना
इस टेलीस्कोप में लगभग 6.5 मीटर (21 फीट) चौड़ा एक दर्पण लगा है, जिस पर सोने की एक पतली परत चढ़ाई गई है। सोना इसलिए चुना गया क्योंकि यह इन्फ्रारेड तरंगों को सबसे अधिक परावर्तित करता है। टेलीस्कोप को सूर्य की गर्मी से बचाने के लिए इसमें टेनिस कोर्ट के आकार की एक सनशील्ड लगी है। यह ढाल टेलीस्कोप को -233°C जैसे अत्यधिक ठंडे तापमान पर रखती है, जो इसके इन्फ्रारेड सेंसर के सही ढंग से काम करने के लिए आवश्यक है।
टेलीस्कोप का मुख्य काम
जेम्स वेब टेलीस्कोप पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर एक ऐसी जगह पर स्थित है, जहां से वह बिना किसी बाधा के अंतरिक्ष की गहराई में झांक सकता है। जब हम बहुत दूर की आकाशगंगा को देखते हैं, तो हम वास्तव में उसके अरबों साल पुराने अतीत को देख रहे होते हैं, क्योंकि उसकी रोशनी को हम तक पहुंचने में उतना ही समय लगता है।
इस टेलीस्कोप का मुख्य उद्देश्य ब्रह्मांड के जन्म यानी बिग बैंग के समय की पहली चमक को पकड़ना है। यह उन सुदूर क्षेत्रों का अध्ययन करता है जहां पहले कभी कोई नहीं पहुंच पाया। इसी प्रयास में यह नई आकाशगंगाओं और तारों की खोज करता है। साथ ही, यह पानी, ऑक्सीजन और मीथेन जैसी गैसों का पता लगाता है, जो यह संकेत दे सकती हैं कि किसी ग्रह या आकाशगंगा पर जीवन की संभावना हो सकती है।
कैसे काम करता है यह टेलीस्कोप?
- इन्फ्रारेड दृष्टि: यह टेलीस्कोप दृश्य प्रकाश की बजाय इन्फ्रारेड तरंगों को पकड़ता है, जिससे यह धूल के बादलों के पार भी देख सकता है।
- अत्यधिक संवेदनशीलता: इसके सेंसर इतने संवेदनशील हैं कि यह चंद्रमा पर मधुमक्खी की गर्मी को भी पहचान सकता है।
- स्थिर स्थिति: यह लैग्रेंज पॉइंट L2 पर स्थित है, जहां पृथ्वी और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण संतुलन इसे स्थिर रखता है और यह बिना किसी रुकावट के काम कर सकता है।
इस तरह, जेम्स वेब टेलीस्कोप न केवल ‘लाल आलू’ जैसी रहस्यमयी आकाशगंगाओं की खोज कर रहा है, बल्कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर के बारे में हमारी समझ को भी बदल रहा है।