एआई के दौर में ऑनलाइन खतरे: 56% अभिभावक और शिक्षक चाहते हैं इंटरनेट सुरक्षा स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा
डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में हुए एक व्यापक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 56 प्रतिशत से अधिक माता-पिता और शिक्षक स्कूलों में इंटरनेट सुरक्षा को एक मुख्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि बच्चों को साइबरबुलिंग, अनुचित सामग्री और निजता के उल्लंघन जैसे बढ़ते ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।
सर्वेक्षण की मुख्य बातें
इस अध्ययन में 1,800 माता-पिता और 300 शिक्षकों की राय शामिल की गई। सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि एआई किस तरह बच्चों की डिजिटल दुनिया को बदल रहा है और इससे उनकी सीखने, संवाद करने और जानकारी समझने की क्षमता पर क्या असर पड़ रहा है। परिणामों ने स्पष्ट संकेत दिया कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली को डिजिटल सुरक्षा के मामले में तुरंत अपडेट करने की आवश्यकता है।
इंटरनेट सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने के सुझाव
सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने इंटरनेट सुरक्षा को पढ़ाने के लिए दो मुख्य तरीके सुझाए। पहला, 32 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना था कि इसे एक अलग विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें हर सप्ताह नियमित कक्षाएं आयोजित हों। दूसरा, 24 प्रतिशत लोगों ने सुझाव दिया कि इसे कंप्यूटर विज्ञान जैसे मौजूदा विषयों के साथ एकीकृत कर दिया जाए, ताकि बच्चे लगातार इस विषय पर सीखते रहें।
विशेषज्ञों की राय: ऑनलाइन सुरक्षा अब एक आवश्यक कौशल
सर्वेक्षण कराने वाले एक प्रतिष्ठित स्कूल के उपाध्यक्ष ने इन नतीजों को एक चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षक यह महसूस कर रहे हैं कि आज के छात्रों की डिजिटल दुनिया पूरी तरह से बदल गई है। एआई इंटरनेट के हर पहलू को प्रभावित कर रहा है, ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा कोई वैकल्पिक विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अनिवार्य जीवन कौशल बन गया है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि स्कूलों की जिम्मेदारी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और समझदारी से काम करने के लिए तैयार करना भी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रमुख ऑनलाइन चिंताएं
सर्वेक्षण में प्रतिभागियों से उन मुख्य ऑनलाइन खतरों के बारे में पूछा गया जिन्हें वे सबसे गंभीर मानते हैं। प्राप्त प्रतिक्रियाओं के अनुसार:
- साइबरबुलिंग: 34 प्रतिशत लोगों ने साइबरबुलिंग को रोकने और इसकी शिकायत करने के लिए एक मजबूत प्रणाली की आवश्यकता को सबसे बड़ी चिंता बताया।
- अनुचित सामग्री और ऑनलाइन शिकारी: 29 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बच्चों को अनुचित सामग्री और ऑनलाइन शिकारियों से बचाने को प्राथमिकता दी।
- निजता की सुरक्षा: 22 प्रतिशत लोगों ने व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और उसे जिम्मेदारी से साझा करने के महत्व पर जोर दिया।
- डिजिटल लत: 15 प्रतिशत प्रतिभागियों ने स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने और बच्चों को डिजिटल लत से बचाने को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
डिजिटल सुरक्षा कक्षाओं की आवृत्ति
जब यह सवाल पूछा गया कि डिजिटल सुरक्षा पर कितनी बार कक्षाएं होनी चाहिए, तो अधिकांश लोगों ने नियमित अंतराल पर सत्र आयोजित करने का समर्थन किया। 42 प्रतिशत लोगों ने हर महीने एक सत्र आयोजित करने की वकालत की। वहीं, 35 प्रतिशत प्रतिभागियों ने हर टर्म में कार्यक्रम चलाने का सुझाव दिया। 16 प्रतिशत लोग साल में दो बार सत्र कराने के पक्ष में थे, जबकि केवल 7 प्रतिशत ने साल में एक बार की कक्षा को पर्याप्त माना।
ऑनलाइन खतरों को लेकर चिंता का स्तर
सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि उभरते ऑनलाइन खतरों को लेकर लोगों में चिंता का स्तर काफी ऊंचा है। 40 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे बच्चों के अनुचित सामग्री के संपर्क में आने और अन्य ऑनलाइन जोखिमों को लेकर ‘बहुत ज्यादा चिंतित’ हैं। उन्होंने इसे एक रोजमर्रा की चिंता बताते हुए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अलावा, 24 प्रतिशत लोगों ने खुद को ‘मध्यम रूप से चिंतित’ बताया।
तैयारी की कमी: एक बड़ी चुनौती
सर्वेक्षण के सबसे चिंताजनक नतीजों में से एक यह था कि केवल 12 प्रतिशत प्रतिभागियों ने महसूस किया कि वे ऑनलाइन सुरक्षा के मुद्दों को सक्रिय रूप से संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। अधिकांश लोगों, यानी 51 प्रतिशत ने स्वीकार किया कि वे कुछ हद तक तैयार हैं, लेकिन उन्हें अधिक संसाधनों और प्रशिक्षण की सख्त जरूरत है। वहीं, 29 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि वे बहुत कम तैयार महसूस करते हैं और तकनीक के तेजी से बदलते परिदृश्य के साथ कदम मिलाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती है। यह आंकड़ा बताता है कि न केवल बच्चों को बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।