दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए स्क्रीन रीडर: सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को एक सप्ताह का समय दिया

सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर की व्यवस्था से जुड़े अनुपालन हलफनामे को दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत प्रदान की है। यह निर्देश सोमवार को एक सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा।

पिछले आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता

शीर्ष अदालत ने 3 दिसंबर को जारी अपने पिछले आदेश में यूपीएससी को निर्देशित किया था कि परीक्षा की सभी अधिसूचनाओं में यह प्रावधान स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए कि पात्र अभ्यर्थी परीक्षा तिथि से कम से कम सात दिन पहले तक अपने लेखक (स्क्राइब) को बदलने का अनुरोध कर सकते हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने आयोग को दो महीने के अंदर एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। इस हलफनामे में स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर को लागू करने की पूरी योजना, उसकी समयसीमा और प्रक्रिया का विस्तृत विवरण होना चाहिए।

तकनीकी मानकीकरण और सुरक्षा पर बल

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि हलफनामे में यह बताया जाना आवश्यक है कि सॉफ्टवेयर और उससे संबंधित व्यवस्था की जांच, मानकीकरण और सभी परीक्षा केंद्रों पर इसे लागू करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने यह जानकारी देने पर भी जोर दिया कि क्या आगामी परीक्षा चक्र से यह सुविधा सभी पात्र अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है या नहीं।

अगली सुनवाई 23 फरवरी को

यह मामला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष विचाराधीन है। यूपीएससी की ओर से पेश वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि आयोग निर्देशों का पूरी तरह से पालन कर रहा है, लेकिन हलफनामा तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। पीठ ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए आयोग को एक सप्ताह का समय दिया और अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तारीख तय की।

दिव्यांग अधिकार: संवैधानिक वादे का हिस्सा

अपने पिछले आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा था कि दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए अधिकार किसी प्रकार की दया या रियायत नहीं हैं, बल्कि समानता, गरिमा और भेदभाव रहित व्यवहार के संवैधानिक वादे का अभिन्न अंग हैं। यह फैसला ‘मिशन एक्सेसिबिलिटी’ नामक संस्था द्वारा दायर याचिका पर आया था। संस्था ने सिविल सेवा परीक्षा में स्क्राइब पंजीकरण की समयसीमा में बदलाव और दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर से लैस लैपटॉप तथा सुलभ डिजिटल प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की मांग की थी।

अन्य महत्वपूर्ण निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को कई अन्य निर्देश भी जारी किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • लेखक बदलने के अनुरोध पर तीन कार्य दिवसों के भीतर कारण सहित निर्णय लिया जाए।
  • दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि विकलांग संस्थान के सहयोग से स्क्रीन-रीडर और अन्य सहायक तकनीकों के उपयोग के लिए एक समान दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल तैयार किया जाए।
  • यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षा प्रक्रिया सुरक्षित, मानकीकृत और सभी के लिए सुलभ हो।

अदालत का यह रुख दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो समान अवसर और सुलभता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।