सुप्रीम कोर्ट ने नीट लीक मामले में जवाबदेही तय करने पर दिया जोर, केंद्र ने कहा- पीएम मोदी स्वयं कर रहे निगरानी
नीट यूजी पेपर लीक प्रकरण की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि इस घटना से न सिर्फ छात्रों बल्कि उनके परिवारों को भी भावनात्मक रूप से गहरा आघात पहुंचा है।
अदालत ने उठाया जवाबदेही का सवाल
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने शुक्रवार को इस मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के पुनर्गठन या उसे बदलकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए एक स्वतंत्र और सशक्त संस्था बनाने की मांग भी शामिल है। पीठ ने स्पष्ट कहा कि जब तक वास्तविक जिम्मेदार तय नहीं किए जाएंगे, यह समस्या बनी रहेगी। अदालत ने यह भी कहा कि छात्र और उनके परिबार इस परीक्षा से गहराई से जुड़े होते हैं, ऐसे में किसी भी लीक की घटना का उन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
सरकार की ओर से आश्वासन
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की खामी न रहे। मेहता ने यह भी जानकारी दी कि 21 जून को आयोजित होने वाली नीट यूजी की पुन: परीक्षा के लिए कई नए सुरक्षा उपाय और प्रक्रियाएं लागू की गई हैं।
अदालत ने मांगा हलफनामा, अगली सुनवाई जुलाई में
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में करने का फैसला किया है।
परीक्षा का पूरा घटनाक्रम
- मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट यूजी परीक्षा इस वर्ष 3 मई को आयोजित की गई थी।
- पेपर लीक के आरोप लगने के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी।
- अब यह परीक्षा 21 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी।
- पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है।