विदेशी शिक्षा के रुझान में बड़ा बदलाव: आयरलैंड में भारतीय छात्रों की रुचि में 38% की वृद्धि

वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय छात्रों की प्राथमिकताओं में एक उल्लेखनीय परिवर्तन देखा जा रहा है। हाल ही में जारी एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2024 में आयरलैंड में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक भारतीय छात्रों की संख्या में 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि उस समय हुई है जब दुनिया भर में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की कुल संख्या में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि अब छात्र और उनके अभिभावक शिक्षा के विकल्पों का मूल्यांकन अधिक सूझबूझ और नई सोच के साथ कर रहे हैं।

आयरलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि

वनस्टेप ग्लोबल द्वारा तैयार ‘स्टूडेंट परसेप्शन स्टडी’ रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में आयरलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। यह संख्या मात्र 700 से बढ़कर 9,000 से अधिक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे पारंपरिक रूप से लोकप्रिय देशों में कड़े वीजा नियमों और अमेरिका में सीमित अवसरों के कारण छात्र अब आयरलैंड की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस बढ़ती लोकप्रियता को बनाए रखने के लिए पाठ्यक्रमों की विविधता, बुनियादी ढांचे (विशेषकर आवास) में सुधार और भारत में एक मजबूत ब्रांड पहचान विकसित करना आवश्यक होगा।

आयरलैंड की बढ़ती लोकप्रियता के प्रमुख कारण

रिपोर्ट के अनुसार, आयरलैंड पारंपरिक ‘बिग फोर’ देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया) के एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहा है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:

  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा
  • अंग्रेजी भाषा में अध्ययन का लाभ
  • अपेक्षाकृत कम अवधि के पाठ्यक्रमों की उपलब्धता
  • शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार के उत्कृष्ट अवसर
  • वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित कंपनियों और उद्योगों की मजबूत उपस्थिति

बढ़ती शिक्षा लागत, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सख्त वीजा नीतियों के बीच, आयरलैंड को अब एक सुरक्षित, स्थिर और करियर-केंद्रित गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है।

अध्ययन की कार्यप्रणाली

इस व्यापक अध्ययन में गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों प्रकार के शोध विधियों का उपयोग किया गया। गुणात्मक शोध के अंतर्गत छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा सलाहकारों के साथ साक्षात्कार और समूह चर्चाएं शामिल थीं। वहीं, मात्रात्मक शोध में 500 छात्रों और उनके माता-पिता के बीच एक विस्तृत सर्वेक्षण किया गया।

छोटे शहरों से बढ़ती भागीदारी

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण प्रवृत्ति सामने आई है कि अब टियर-2 और टियर-3 शहरों जैसे गुवाहाटी, कोयंबटूर, कोच्चि, इंदौर और विशाखापत्तनम से भी बड़ी संख्या में छात्र विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आगे आ रहे हैं। बेहतर शिक्षा ऋण सुविधाओं, डिजिटल जागरूकता और काउंसलिंग समर्थन के कारण इन शहरों के छात्र अब अधिक आत्मविश्वास के साथ अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के विकल्प तलाश रहे हैं। विशेष रूप से, इन क्षेत्रों के अभिभावक विदेश में पढ़ाई के लिए पहले की तुलना में अधिक तैयार हैं, लेकिन वे सुरक्षा, खर्च और करियर के अवसरों को लेकर सतर्क रहते हैं।

विशेषज्ञों की राय

टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ऑफ द शैनन की ग्लोबल रिक्रूटमेंट डायरेक्टर फियोना मैक्की ने कहा कि आज के छात्र केवल डिग्री हासिल करने के बजाय बेहतर करियर का रास्ता तलाश रहे हैं और आयरलैंड इस आवश्यकता को पूरी तरह से पूरा कर रहा है। वहीं, मेनूथ यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल वाइस प्रेसिडेंट पैट्रिक मैककोल ने कहा कि आयरलैंड खुद को एक सुरक्षित, भरोसेमंद और करियर-केंद्रित शिक्षा गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय छात्र देश की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।