शिक्षा मंत्रालय के बाहर छात्रों का विरोध प्रदर्शन, एनटीए और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग
राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर सोमवार को छात्र संगठनों ने शिक्षा मंत्रालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नीट, सीयूईटी और अन्य परीक्षाओं में बार-बार हो रही गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग उठाई।
मंत्रालय तक मार्च का प्रयास और पुलिस हिरासत
यह प्रदर्शन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) के नेतृत्व में आयोजित किया गया था, जिसमें क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान छात्रों ने पेपर लीक, अंक गणना में त्रुटियों और परीक्षा संचालन में लापरवाही के खिलाफ नारेबाजी की।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 8 से 10 छात्रों को हिरासत में लिया। प्रदर्शन में शामिल संगठनों के अनुसार, हिरासत में लिए गए छात्रों और कार्यकर्ताओं को कपासहेड़ा पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्हें कई घंटों तक रखा गया।
छात्र संगठनों के आरोप
एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने आरोप लगाया कि एनटीए शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी समस्याओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। एआईएसए की दिल्ली विश्वविद्यालय सचिव अंजलि ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करने के बजाय विरोध प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
केवाईएस के कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। संगठन ने एनटीए को भंग करने और परीक्षा एजेंसी के कामकाज की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की भी मांग उठाई।
नीट और सीयूईटी परीक्षाओं का उल्लेख
केवाईएस ने अपने बयान में इस साल नीट परीक्षा रद्द होने की घटना का जिक्र किया, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द किया गया था। इसके अलावा संगठन ने 30 मई को आयोजित सीयूईटी-यूजी परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियों और कई परीक्षा केंद्रों पर सामने आई अव्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया।
संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं ने छात्रों के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। नीट, सीयूईटी, एसएससी और सीबीएसई जैसी परीक्षाओं में बार-बार हो रही गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
कोचिंग उद्योग और शिक्षा के व्यावसायीकरण पर सवाल
केवाईएस ने यह भी कहा कि बार-बार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों को शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण और कोचिंग उद्योग के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। छात्र संगठनों ने केंद्र सरकार से परीक्षा विवादों पर सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए बड़े स्तर पर संरचनात्मक सुधार जरूरी हैं।
प्रदर्शन में शामिल अन्य मांगें
- परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच
- पेपर लीक मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सुधार
- प्रभावित छात्रों के लिए उचित मुआवजा और पुनर्परीक्षा की व्यवस्था
प्रदर्शनकारी छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने देशभर के छात्रों से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया।