सोमवती अमावस्या 2026: कुंडली में कमजोर चंद्रमा वालों के लिए खास मौका, जानें शुभ मुहूर्त और उपाय

ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी द्वारा लिखित यह लेख आपको सोमवती अमावस्या के महत्व, शुभ मुहूर्त और विशेष उपायों के बारे में बताएगा। इस वर्ष यह अमावस्या अधिक मास में पड़ रही है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।

कब है सोमवती अमावस्या?

सोमवती अमावस्या इस वर्ष 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब अमावस्या का दिन सोमवार को पड़ता है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन दुर्लभ सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का महासंयोग भी बन रहा है।

अमावस्या तिथि का आरंभ 14 जून, रविवार को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर होगा। इसका समापन 15 जून, सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 15 जून को ही सोमवती अमावस्या का व्रत और स्नान-दान किया जाएगा।

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

इस दिन स्नान और दान के लिए विशेष समय निर्धारित किया गया है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 4 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इसके बाद स्नान-दान का मुख्य मुहूर्त सुबह 5 बजकर 16 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।

क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या?

इस वर्ष सोमवती अमावस्या ज्येष्ठ अधिक मास में पड़ रही है, जिससे इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, मंत्रोच्चार करने और धार्मिक अनुष्ठान करने से स्थायी पुण्य की प्राप्ति होती है। इससे जीवन में आनंद, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित अनुष्ठान करने से वैवाहिक सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, तर्पण और श्राद्ध करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और पितृ दोष शांत होता है।

किन लोगों के लिए विशेष है यह दिन?

यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है:

  • जिनका जन्म अमावस्या के दिन हुआ है।
  • जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है।
  • जिनके चंद्रमा छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हैं।

ऐसे लोगों को इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए और सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए। इससे मानसिक तनाव, अशांति और जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है।

सोमवती अमावस्या पर करें ये उपाय

इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर पति की लंबी उम्र के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा करना भी इस दिन का विशेष महत्व है। अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय

ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए ये उपाय कर सकते हैं:

  • अपने घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और हर कोने में उचित प्रकाश की व्यवस्था करें।
  • सायंकाल घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
  • पूजा के दौरान लक्ष्मीअष्टकं या श्रीसूक्त का विशेष रूप से पाठ करें।

मांगलिक कार्यों की शुरुआत

15 जून के बाद मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो जाएगा। ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या के साथ ही मलमास का समापन होगा और शुद्ध ज्येष्ठ मास की शुरुआत होगी। 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष आरंभ होगा। इसके बाद 19 जून से विवाह सहित सभी शुभ मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।