सोमवती अमावस्या 2026: दुर्लभ संयोग में स्नान-दान का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, और जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस वर्ष 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन कई दुर्लभ खगोलीय संयोग एक साथ बन रहे हैं, जो इसे और भी अधिक पुण्यदायी बना रहे हैं। आइए जानते हैं इस विशेष दिन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी।
सोमवती अमावस्या तिथि का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के अधिकमास की यह अमावस्या तिथि 15 जून 2026 को सुबह 08 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि आरंभ हो जाएगी। इसी दिन अधिकमास का समापन भी हो रहा है। इस दिन सोमवती अमावस्या के साथ-साथ मिथुन संक्रांति, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं।
इस बार की सोमवती अमावस्या क्यों है खास?
इस वर्ष सोमवती अमावस्या पर एक महासंयोग बन रहा है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, जबकि अमावस्या तिथि पितरों की आराधना के लिए जानी जाती है। इसके अलावा, इस दिन मिथुन संक्रांति और अधिकमास का अंतिम दिन भी है। पंचांग गणना के अनुसार, सोमवार, अमावस्या, सूर्य संक्रांति और अधिकमास का यह संयोग सदियों में एक बार ही देखने को मिलता है। यह दुर्लभ संयोग इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ के महत्व को कई गुना बढ़ा देता है।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में अमावस्या तिथि पर पवित्र नदी में स्नान, दान और पितरों को तर्पण देने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन किया गया दान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन का महत्व कई कारणों से है:
- पितरों के लिए: यह दिन पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित है।
- भगवान शिव की आराधना: सोमवार होने के कारण भगवान शिव की पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।
- भगवान विष्णु की पूजा: अधिकमास के अंतिम दिन होने के कारण भगवान विष्णु की उपासना का भी विधान है।
- सूर्य देव की आराधना: मिथुन संक्रांति के कारण सूर्य देव की पूजा का भी विशेष योग बन रहा है।
इसके अलावा, इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने, धार्मिक अनुष्ठान करने और जरूरतमंदों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
सोमवती अमावस्या पर करें ये कार्य
इस पावन अवसर पर कुछ विशेष कार्य करने से आपको भगवान शिव और पितरों की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है:
- प्रातःकाल जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि यह संभव न हो तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और उगते सूर्य को अर्घ्य दें।
- शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध और बिल्वपत्र अर्पित करें।
- भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें तुलसी दल, पीले फूल और मिष्ठान का भोग लगाएं।
- पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और वहां घी का दीपक जलाकर आरती करें।
- पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
पूजा का शुभ मुहूर्त और पुण्यकाल
पंचांग के अनुसार, 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक सोमवती अमावस्या और संक्रांति का पुण्यकाल रहेगा। इस समयावधि में किया गया स्नान, ध्यान, जप, पूजा-पाठ और दान अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए पूजन और व्रत से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
यह जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है।