भारत में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की संभावना, आईटी मंत्री ने दिए संकेत

देश में बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है। हाल ही में आयोजित एआई समिट के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर सख्ती के संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सरकारी स्तर पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है।

सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच बातचीत

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार फिलहाल विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ संवाद कर रही है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य उम्र-आधारित पहुंच नियंत्रण और डीपफेक जैसी गंभीर चुनौतियों पर सहमति बनाना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act) में पहले से ही बच्चों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार की मंशा है कि नाबालिगों को केवल उनकी उम्र के अनुरूप और सुरक्षित सामग्री ही दिखाई जाए।

हालांकि, मंत्री ने किसी पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा नहीं की, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह संकेत स्पष्ट है कि आने वाले समय में नियमों में कड़ाई देखी जा सकती है।

डिजिटल कंपनियों के लिए सख्त संदेश

आईटी मंत्री ने भारत में काम करने वाली सभी डिजिटल कंपनियों को सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मेटा, एक्स, यूट्यूब और नेटफ्लिक्स जैसी बड़ी कंपनियों को भी भारत के कानून और संविधान का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कंपनियां देश की संप्रभुता और सुरक्षा नियमों से ऊपर नहीं हैं। इस बयान को तकनीकी कंपनियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

डीपफेक तकनीक पर सख्ती की तैयारी

मंत्री ने डीपफेक तकनीक को एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि मौजूदा नियम इस चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर संसद में व्यापक सहमति बनाकर और कड़े कानून लाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि एक संसदीय समिति इस विषय पर विस्तृत अध्ययन कर चुकी है। DPDP कानून में पहले से ही छात्रों और युवाओं के लिए सामग्री नियंत्रण से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना है जहां तकनीक का लाभ तो मिले, लेकिन समाज को नुकसान न पहुंचे।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण और भारत का रुख

मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू कर दिया है। वहीं, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम में माता-पिता की सहमति और उम्र सीमा को लेकर सख्त कानून बनाए गए हैं।

सरकार अभी कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर नए नियामक उपायों को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह साफ है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में भी बड़े बदलाव हो सकते हैं।