शीतला अष्टमी 2026: जानिए पूजा का महत्व, नियम और वर्जनाएं

हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह पर्व होली के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। इस दिन माता शीतला की विशेष पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता को रोगों की देवी माना जाता है, जो अपने भक्तों को विभिन्न बीमारियों और कष्टों से बचाती हैं। देवी शीतला को माता पार्वती का ही एक स्वरूप माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और कुछ विशेष नियमों का पालन करने से घर में सुख, शांति और आरोग्य बना रहता है। कई स्थानों पर इस दिन माता को बासी या ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसे ‘बसौड़ा’ कहा जाता है।

शीतला माता की पूजा का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता अपने हाथों में झाड़ू, सूप और कलश धारण करती हैं। उनकी सवारी गधा मानी गई है। इन प्रतीकों का संबंध घर की अशुद्धियों, रोगों और कष्टों को दूर करने से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि इस दिन माता की पूजा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और परिवार के सभी सदस्यों को स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शीतला अष्टमी के दिन क्या करें

  • प्रातःकाल स्नान कर पूजा करें: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनकर शीतला माता की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
  • जल से माता का अभिषेक करें: पूजा के समय माता को हल्दी मिला हुआ शीतल जल अर्पित करना चाहिए। इससे घर में मंगल और शांति बनी रहती है। शुद्ध मिट्टी के कोरे पात्र में भरे जल से अभिषेक करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
  • बासी भोजन का भोग लगाएं: एक दिन पहले बनाए गए ठंडे भोजन का भोग माता को लगाकर परिवार के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ होता है। कई स्थानों पर मिट्टी की सकोरियों में माता को प्रसाद चढ़ाया जाता है।
  • घर के दरवाजों पर हल्दी के छाप लगाएं: कई स्थानों पर इस दिन घर के मुख्य द्वार पर हल्दी के छाप लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • शीतला माता के रोग निवारक मंत्र का जप करें: इस दिन माता के इस मंत्र का श्रद्धा से जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। नियमित जप करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।

“शीतले त्वं जगत् माता, शीतले त्वं जगत् पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री, शीतलायै नमो नमः॥”

शीतला अष्टमी के दिन क्या न करें

  • घर में चूल्हा या गैस न जलाएं: इस दिन नया भोजन बनाना वर्जित माना जाता है, इसलिए एक दिन पहले तैयार भोजन ही ग्रहण किया जाता है।
  • गरम या ताजा भोजन न खाएं: धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन केवल ठंडा या बासी भोजन ही खाना चाहिए।
  • घर में झगड़ा या कटु वचन न बोलें: इस दिन शांत और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना शुभ माना जाता है।
  • अनावश्यक क्रोध से बचें: क्रोध और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना चाहिए, ताकि माता की कृपा बनी रहे।
  • पूजा के नियमों की अवहेलना न करें: शीतला माता की पूजा श्रद्धा और नियमों के साथ करनी चाहिए। लापरवाही से पूजा करने से बचना चाहिए।