शापूर जादरान की मौत का कारण: क्या है एचएलएच बीमारी?

अफगानिस्तान क्रिकेट के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान का 7 जुलाई, 2026 को 38 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी ‘हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस’ (एचएलएच) से पीड़ित थे। पिछले कुछ समय से उनका इलाज दिल्ली में चल रहा था। बीमार पड़ने के बाद, अफगानिस्तान के डॉक्टरों की सलाह पर वह इलाज के लिए भारत आए थे। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए शोक व्यक्त किया और उन्हें देश में क्रिकेट की नींव रखने वाला खिलाड़ी बताया।

यह बीमारी इम्यून सिस्टम से जुड़ी एक जटिल स्थिति है, जिसमें शरीर की रक्षा करने वाली कोशिकाएं ही अनियंत्रित होकर नुकसान पहुंचाने लगती हैं। आइए समझते हैं कि आखिर यह बीमारी क्या है और यह कैसे जानलेवा साबित हो सकती है।

क्या है हीमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (एचएलएच)?

सामान्य परिस्थितियों में हमारा इम्यून सिस्टम वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमणों से लड़कर शरीर को स्वस्थ रखता है। लेकिन एचएलएच में यही सिस्टम बेकाबू हो जाता है। शरीर की रक्षा करने वाली श्वेत रक्त कोशिकाएं, विशेष रूप से हिस्टियोसाइट्स और लिम्फोसाइट्स, अत्यधिक सक्रिय हो जाती हैं। ये कोशिकाएं लगातार सूजन पैदा करने वाले रसायन छोड़ने लगती हैं और शरीर की अन्य स्वस्थ रक्त कोशिकाओं पर हमला करने लगती हैं।

इस प्रक्रिया में ये असामान्य कोशिकाएं प्लीहा और लिवर जैसे अंगों में जमा हो जाती हैं, जिससे ये अंग बड़े हो जाते हैं। इसके अलावा, बोन मैरो, फेफड़े और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंग भी प्रभावित हो सकते हैं। यह एक दुर्लभ बीमारी है, जो आमतौर पर शिशुओं और छोटे बच्चों में देखी जाती है, लेकिन वयस्कों में भी हो सकती है।

एचएलएच बीमारी के प्रमुख कारण

एचएलएच के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं: प्राथमिक (आनुवंशिक) और द्वितीयक (अर्जित)।

  • आनुवंशिक कारण: लगभग 25% मामलों में यह बीमारी आनुवंशिक होती है। यदि माता-पिता दोनों में इस बीमारी से जुड़े जीन की समस्या है, तो बच्चे में इसके विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है। यह रूप आमतौर पर बचपन में ही सामने आता है।
  • द्वितीयक कारण: वयस्कों में एचएलएच अक्सर अन्य बीमारियों के कारण होता है। इनमें शामिल हैं:
    • गंभीर वायरल संक्रमण (जैसे एपस्टीन-बार वायरस)
    • कमजोर इम्यून सिस्टम
    • कैंसर, विशेष रूप से लिंफोमा
    • कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां

    इन स्थितियों में इम्यून सिस्टम पहले से ही कमजोर या असामान्य होता है, जो एचएलएच को ट्रिगर कर सकता है।

एचएलएच बीमारी के लक्षण

इस बीमारी के लक्षण अक्सर सामान्य संक्रमण जैसे दिखते हैं, जिससे इसका निदान मुश्किल हो जाता है। हालांकि, कुछ प्रमुख लक्षण लगातार बने रहते हैं:

  • लगातार तेज बुखार: यह सबसे आम लक्षण है, जो दवाओं से भी आसानी से कम नहीं होता।
  • अत्यधिक कमजोरी और थकान: मरीज को लगातार थकान और सुस्ती महसूस होती है।
  • भूख न लगना और वजन कम होना: शरीर में लगातार सूजन के कारण भूख प्रभावित होती है।
  • लिवर और प्लीहा का बढ़ना: इसके कारण पेट में सूजन, दर्द या बेचैनी महसूस हो सकती है।
  • त्वचा पर दाने: कई मरीजों में त्वचा पर लाल चकत्ते या दाने निकल आते हैं।
  • रक्त कोशिकाओं की कमी: बोन मैरो पर प्रभाव के कारण एनीमिया (खून की कमी), प्लेटलेट्स की कमी और सफेद रक्त कोशिकाओं की कमी हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
  • पीलिया और सांस लेने में तकलीफ: लिवर और फेफड़ों पर असर पड़ने से ये समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
  • तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं: सिरदर्द, चलने में कठिनाई, दृष्टि संबंधी समस्याएं और भ्रम की स्थिति हो सकती है।

यह बीमारी कैसे बनती है जानलेवा?

एचएलएच में इम्यून सिस्टम की अत्यधिक सक्रियता पूरे शरीर में गंभीर सूजन पैदा करती है। यह लगातार सूजन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाती है। बोन मैरो में रक्त कोशिकाओं का निर्माण बाधित होता है, जिससे गंभीर एनीमिया और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी तेजी से बढ़ती है और निम्नलिखित जटिलताओं को जन्म दे सकती है:

  • लिवर फेलियर (जिगर खराब होना)
  • किडनी डैमेज (गुर्दे खराब होना)
  • फेफड़ों में गंभीर समस्या और सांस विफलता
  • मस्तिष्क में सूजन और तंत्रिका तंत्र को स्थायी क्षति
  • मल्टी-ऑर्गन फेलियर (एक साथ कई अंगों का खराब होना)

यही कारण है कि एचएलएच को एक तेजी से बढ़ने वाली और जानलेवा बीमारी माना जाता है। शापूर जादरान जैसे युवा एथलीट की मौत इस बीमारी की गंभीरता को रेखांकित करती है। समय पर निदान और उचित चिकित्सा के बावजूद, यह बीमारी कई बार घातक साबित हो सकती है।