भारत का सेमीकंडक्टर मिशन: चार वर्षों में तेजी से बदलती तस्वीर

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की चौथी वर्षगांठ पर देश की सेमीकंडक्टर नीति का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख शक्ति बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। इस मिशन के तहत अब तक जमीनी स्तर पर कई ठोस उपलब्धियां हासिल की गई हैं, जो देश की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को नई दिशा दे रही हैं।

चार वर्षों में दस बड़ी परियोजनाओं पर काम

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देशभर में दस बड़ी सेमीकंडक्टर परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है। इनमें से चार परियोजनाओं में इसी वर्ष उत्पादन शुरू होने की संभावना है। यह भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी छलांग साबित होगी। साथ ही, स्टार्टअप क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। लगभग 24 स्टार्टअप ने सफलतापूर्वक स्वदेशी चिप डिजाइन तैयार कर लिए हैं, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है।

शिक्षा और प्रशिक्षण पर विशेष जोर

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए देश के 315 शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों को चिप डिजाइनिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य एक कुशल और तैयार वर्कफोर्स तैयार करना है, जो सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती मांगों को पूरा कर सके। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम देश को लंबी अवधि में तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

स्वदेशी तकनीक और बौद्धिक संपदा पर फोकस

मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल चिप असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना चाहता है। इस मिशन के तहत छह प्रमुख प्रणालियों में स्वदेशी बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इनमें कंप्यूट, रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF), नेटवर्किंग, पावर, सेंसर और मेमोरी शामिल हैं। यह कदम भारत को वैश्विक तकनीकी श्रृंखला में एक मजबूत स्थान दिलाएगा।

2029 और 2035 के लिए स्पष्ट लक्ष्य

अश्विनी वैष्णव ने भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं के लिए एक स्पष्ट समयसीमा भी तय की है। उनके अनुसार, वर्ष 2029 तक भारत इस उद्योग में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरेगा। वहीं, 2035 तक देश दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर राष्ट्रों की सूची में शामिल हो जाएगा। यह मिशन न केवल भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप आपूर्ति श्रृंखला में उसकी भूमिका को भी निर्णायक बना देगा।