यूपीएससी 2025: खंडवा की रूपल जायसवाल ने 43वीं रैंक हासिल कर बताया सफलता का राज़
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम जारी कर दिए हैं। इस बार आयोग ने कुल 958 उम्मीदवारों को विभिन्न सेवाओं के लिए अनुशंसित किया है। इन्हीं में मध्य प्रदेश के खंडवा की रूपल धनंजय जायसवाल का नाम शामिल है, जिन्होंने ऑल इंडिया 43वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ा दी है।
तीसरे प्रयास में मिली सफलता
रूपल जायसवाल के लिए यह यूपीएससी परीक्षा का तीसरा प्रयास था। इससे पहले उन्होंने दूसरे प्रयास में भी सफलता हासिल की थी, जिसमें उनकी ऑल इंडिया रैंक 512 थी। हालांकि, वह उस रैंक से संतुष्ट नहीं थीं और बेहतर प्रदर्शन के लिए एक बार फिर परीक्षा देने का निर्णय लिया। लगातार मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने इस बार अपने लक्ष्य को पार कर लिया।
पढ़ाई का सुनियोजित शेड्यूल
रूपल ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित पढ़ाई और स्मार्ट वर्क को दिया। उन्होंने बताया कि वह आमतौर पर रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। मुख्य परीक्षा से लगभग दो महीने पहले उन्होंने अपनी पढ़ाई का समय बढ़ाकर 10 घंटे प्रतिदिन कर लिया था। उनका मानना है कि घंटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण है पढ़ाई में निरंतरता और एकाग्रता।
सफलता का मूल मंत्र: नियमितता और निरंतरता
रूपल के अनुसार, यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए रोजाना 12-12 घंटे पढ़ना जरूरी नहीं है। उनका कहना है कि अगर तैयारी में नियमितता और निरंतरता बनी रहे, तो कम समय में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और सही रणनीति ही सफलता की कुंजी है।
परिवार का योगदान अहम
अपनी इस उपलब्धि का श्रेय रूपल ने अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के लगातार सहयोग और प्रोत्साहन के बिना यह संभव नहीं था। कठिन समय में परिवार का साथ और विश्वास ही उनकी ताकत बना। उनके अनुसार, जब कभी हार मानने का मन होता, तो परिवार का हौसला उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता था।
रूपल जायसवाल की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करते हैं। उनकी सफलता यह सिखाती है कि धैर्य और नियमित प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।