भारत में AI का लाभ: क्या सिर्फ बड़े शहर ही हैं आगे?

भारत आज दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते एआई बाजारों में गिना जाता है, लेकिन एक नई रिपोर्ट बताती है कि इस तकनीक का फायदा अभी भी सीमित दायरे में ही पहुंच रहा है। ओपनएआई द्वारा जारी एक अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जो देश में एआई के असमान वितरण को उजागर करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चैटजीपीटी के लगभग 50 प्रतिशत सक्रिय उपयोगकर्ता सिर्फ दस बड़े शहरों में रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि इन शहरों की कुल आबादी देश की कुल आबादी का मात्र 10 प्रतिशत है। यह आंकड़ा साफ तौर पर दिखाता है कि एआई तकनीक का लाभ अभी भी महानगरों और टेक हब्स तक ही सीमित है, जबकि छोटे शहर और ग्रामीण इलाके इससे दूर बने हुए हैं।

एआई कैपेबिलिटी गैप क्या है?

इस रिपोर्ट में एक नया शब्द ‘एआई कैपेबिलिटी गैप’ सामने आया है। ओपनएआई की सीईओ (एप्लीकेशन्स) फिजी सिमो ने इसे सरल भाषा में समझाया है। यह गैप उस अंतर को दर्शाता है जो एआई मॉडल्स की क्षमता और उनके वास्तविक उपयोग के बीच मौजूद है। दूसरे शब्दों में, एआई जितना कर सकता है और हम उसका उपयोग उतना नहीं कर पा रहे हैं। ओपनएआई ने 2026 को इसी गैप को पाटने का साल माना है, ताकि एआई सिर्फ कोडिंग और टेक्निकल कामों तक सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का हल बन सके।

टेक हब्स में एआई का दबदबा

एआई टूल्स का सबसे अधिक उपयोग बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और चेन्नई जैसे टेक हब्स में हो रहा है। ये वे शहर हैं जहां आईटी कंपनियां और स्टार्टअप्स केंद्रित हैं। उदाहरण के लिए, ओपनएआई के कोडिंग टूल कोडेक्स का उपयोग लॉन्च के दो हफ्तों के भीतर भारत में चार गुना बढ़ गया। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इसके उपयोग में नौ गुना तक का अंतर देखा गया है। इससे साफ है कि तकनीकी बुनियादी ढांचा और डिजिटल साक्षरता एआई अपनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में एआई का बढ़ता कदम

रिपोर्ट का एक सकारात्मक पहलू यह है कि कुछ कम विकसित राज्यों में एआई का उपयोग शिक्षा के लिए तेजी से बढ़ रहा है। असम, ओडिशा, मणिपुर, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चैटजीपीटी का उपयोग पढ़ाई-लिखाई से जुड़े सवालों के लिए किया जा रहा है। खास बात यह है कि असम में चैटजीपीटी पर भेजे जाने वाले 22 प्रतिशत संदेश शिक्षा से संबंधित होते हैं, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और पहुंच मिलने पर एआई शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है।

स्वास्थ्य सेवा में एआई की भूमिका

जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में लोग स्वास्थ्य संबंधी सवालों के लिए एआई का अधिक उपयोग कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में हर दस में से एक सवाल स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। यह आंकड़ा बताता है कि जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है, वहां एआई एक विकल्प के रूप में उभर रहा है। कुल मिलाकर, भारत में चैटजीपीटी के 100 मिलियन से अधिक साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं, जो ओपनएआई के सबसे बड़े बाजारों में से एक बन चुका है।

आगे की चुनौती और संभावनाएं

ओपनएआई के मैनेजिंग डायरेक्टर (इंटरनेशनल) ओलिवर जे ने स्पष्ट कहा है कि अब असली चुनौती यह है कि एआई के लाभ उन लोगों तक कैसे पहुंचाए जाएं जो अभी भी इससे दूर हैं। इस कैपेबिलिटी गैप को बंद करने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं: बेहतर पहुंच, कौशल विकास और सार्थक उपयोग। एआई को अक्सर समानता लाने वाली तकनीक कहा जाता है, लेकिन अगर यह सिर्फ बड़े शहरों के डेवलपर्स तक सीमित रहेगी, तो यह समानता कैसे आएगी? भारत की युवा आबादी इस अंतर को मिटाने की कुंजी है, बशर्ते उन्हें सही अवसर और संसाधन दिए जाएं।