पेट की गैस की आम दवा: क्या यह कैंसर का जोखिम बढ़ा सकती है?

अक्सर पेट में जलन, गैस या एसिडिटी होने पर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवा ले लेते हैं। यह आदत सामान्य लग सकती है, लेकिन इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हाल के अध्ययनों में एक लोकप्रिय एसिडिटी दवा को लेकर चिंता जताई गई है, जो लंबे समय तक उपयोग करने पर कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है। दुनिया के कई देशों ने इस दवा पर पाबंदी लगा दी है, जबकि भारत में यह आसानी से उपलब्ध है।

हम बात कर रहे हैं रैनिटिडीन नामक दवा की, जो पेट में एसिड को कम करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाती है। यह दवा बाजार में कई ब्रांड नामों से बेची जाती है। इसका मुख्य काम पेट में एसिड के उत्पादन को घटाना है, जिससे जलन और दर्द में तुरंत राहत मिलती है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, इस दवा का नियमित या लंबे समय तक सेवन शरीर में कैंसर पैदा करने वाले तत्वों को जन्म दे सकता है।

रैनिटिडीन और कैंसर का संबंध

रैनिटिडीन एक एच2-रिसेप्टर ब्लॉकर दवा है, जो पेट की कोशिकाओं पर असर करके एसिड के स्राव को कम करती है। यह जल्दी असर करती है और सस्ती होने के कारण लोग इसे पसंद करते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि यह दवा अपनी रासायनिक संरचना के कारण धीरे-धीरे एक खतरनाक यौगिक में बदल सकती है। इस यौगिक को एन-नाइट्रोसोडाइमिथाइलएमीन (एनडीएमए) कहा जाता है।

एनडीएमए एक अत्यधिक विषैला और कार्सिनोजेनिक रसायन है, जो कैंसर पैदा करने की क्षमता रखता है। यह पीले रंग का वाष्पशील कार्बनिक यौगिक है, जो दवा के निर्माण के दौरान या उसे स्टोर करने पर बन सकता है। खासकर, जब दवा को कमरे के तापमान से अधिक गर्मी में रखा जाता है, तो एनडीएमए बनने का खतरा और बढ़ जाता है। इसके अलावा, दवा की आंतरिक अस्थिरता भी इसे खतरनाक बनाती है।

कैसे बनता है एनडीएमए और इसका प्रभाव

रैनिटिडीन की रासायनिक संरचना स्वाभाविक रूप से एनडीएमए में परिवर्तित होने लगती है। यह प्रक्रिया तब तेज हो जाती है जब दवा अधिक तापमान के संपर्क में आती है। यही कारण है कि दवा को सही तरीके से स्टोर न करने पर इसका खतरा बढ़ जाता है। कई अध्ययनों में एनडीएमए को मनुष्यों में कैंसर पैदा करने वाले तत्व के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लंबे समय तक इस दवा की उच्च खुराक लेने से भी कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने एनडीएमए को संभावित कार्सिनोजेन घोषित किया है। इसलिए, इस दवा का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

किन देशों में लगाई गई पाबंदी?

रैनिटिडीन के संभावित खतरों को देखते हुए कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। 2020 में, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सभी रैनिटिडीन उत्पादों को बाजार से हटाने का आदेश दिया। इसके अलावा, यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भी इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में मूल दवाओं को वापस ले लिया गया, लेकिन बाद में नए फॉर्मूले वाली सुरक्षित दवाओं को मंजूरी दी गई। यूनाइटेड किंगडम में इसके सभी लाइसेंस निलंबित हैं, और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा इसे विश्व स्तर पर अनुपलब्ध बताती है। भारत में अभी तक इस दवा पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन इसकी बिक्री और निर्माण पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।

डॉक्टरों की सलाह और सुरक्षित विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, रैनिटिडीन की जगह पर अन्य सुरक्षित दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टरों का कहना है कि वे अब मरीजों को रैनिटिडीन नहीं लिखते हैं। इसके बजाय, वे फैमोटिडाइन और सिमेटिडीन जैसी दवाओं की सलाह देते हैं। ये दवाएं भी एच2-रिसेप्टर ब्लॉकर हैं और एसिडिटी को कम करने में प्रभावी हैं। पैंटोप्राजोल भी एक अच्छा विकल्प है। ये दवाएं थोड़ी महंगी हो सकती हैं और इनका असर देर से हो सकता है, लेकिन ये स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं।

गैस और एसिडिटी से बचने के प्राकृतिक उपाय

दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय जीवनशैली और खानपान में बदलाव करना अधिक प्रभावी होता है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:

  • खाने के तुरंत बाद न लेटें। कम से कम 1-2 घंटे का अंतर रखें।
  • मसालेदार, तले हुए और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
  • छोटे-छोटे अंतराल में भोजन करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • हल्की एसिडिटी में अदरक, सौंफ या छाछ जैसे प्राकृतिक उपाय अपनाएं।
  • नियमित व्यायाम करें और वजन को नियंत्रण में रखें। यह एसिड रिफ्लक्स को कम करने में मदद करता है।

रैनिटिडीन का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। यह दवा कुछ लोगों के लिए हानिकारक हो सकती है, खासकर यदि इसका लंबे समय तक सेवन किया जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गैस और एसिडिटी की समस्या से निपटने के लिए दवाओं की तुलना में जीवनशैली में सुधार अधिक सुरक्षित और प्रभावी है।