एनटीए पर फिर उठे सवाल: क्या एआई से बना समाजशास्त्र का पेपर? अंग्रेजी में 67 प्रश्न दोहराने का आरोप

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। नीट और पीयू पेपर लीक मामलों के बाद, अब यूजीसी नेट 2026 की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर अंग्रेजी और समाजशास्त्र विषयों के प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

अंग्रेजी पेपर में पुराने प्रश्नों की पुनरावृत्ति

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के अनुसार, यूजीसी नेट 2026 के अंग्रेजी विषय के पेपर में कुल 150 प्रश्न पूछे गए, जिनमें से 67 प्रश्न दो साल पहले 2024 में आए पेपर से मिलते-जुलते बताए जा रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह परीक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। परीक्षा में दो पेपर होते हैं—पहला पेपर तर्कशक्ति और सामान्य ज्ञान पर आधारित 50 प्रश्नों का होता है, जो सभी विषयों के उम्मीदवारों के लिए समान होता है। दूसरा पेपर विषय-विशेष के 100 प्रश्नों का होता है। आरोप है कि इस बार दूसरे पेपर में बड़ी संख्या में प्रश्न पुराने सेट से दोहराए गए।

समाजशास्त्र पेपर: एआई और गलतियों का अंबार

समाजशास्त्र विषय के पेपर को लेकर अभ्यर्थियों का आरोप और भी गंभीर है। कई विद्यार्थियों ने दावा किया है कि यह प्रश्नपत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार किया गया। एक पीएचडी शोधार्थी ने सोशल मीडिया पर विस्तार से बताया कि पेपर में पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल पूछे गए। कई प्रश्न ऐसे विचारकों और पुस्तकों पर आधारित थे, जिनका निर्धारित पाठ्यक्रम से कोई संबंध नहीं है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 50 प्रतिशत प्रश्नों की वर्तनी में गंभीर गलतियां पाई गईं। उदाहरण के लिए, प्रसिद्ध समाजशास्त्री ‘Ritzer’ को ‘Putzer’, ‘Parsons’ को ‘Parsow’, ‘Ghurye’ को ‘Ghunye’, ‘A R Desai’ को ‘A K Desai’ और ‘Nussbaum’ को ‘Nusbaut’ लिखा गया। शोधार्थियों का कहना है कि व्याकरण और अनुवाद में भी बेहद लापरवाही बरती गई। हिंदी अनुवाद इतना खराब था कि उसे पढ़कर ऐसा लगा जैसे किसी छोटे बच्चे ने लिखा हो। जब छात्र प्रश्न का अर्थ ही नहीं समझ पाएंगे, तो वे सही उत्तर कैसे दे सकते हैं?

एनटीए की चुप्पी से बढ़ी चिंता

इन सभी आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस चुप्पी ने अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ा दी है। परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर उठते सवालों के बीच छात्र संगठनों ने एनटीए से जल्द से जल्द स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

परीक्षा प्रक्रिया पर गहराता संकट

पिछले कुछ महीनों में नीट और पीयू जैसी प्रमुख परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। अब यूजीसी नेट में प्रश्नों की पुनरावृत्ति और एआई से पेपर बनाने के आरोपों ने एनटीए की विश्वसनीयता पर गहरा आघात किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो देश की प्रमुख प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं की विश्वसनीयता को स्थायी नुकसान हो सकता है।

  • अंग्रेजी पेपर में 150 में से 67 प्रश्न पुराने पेपर से दोहराए जाने का आरोप
  • समाजशास्त्र पेपर में 50% प्रश्नों में वर्तनी की गंभीर त्रुटियां
  • पाठ्यक्रम से बाहर के विचारकों और पुस्तकों से सवाल पूछे जाने का दावा
  • एनटीए द्वारा अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई

अभ्यर्थियों ने मांग की है कि प्रभावित विषयों की पुनः परीक्षा कराई जाए या प्रश्नपत्रों की विस्तृत समीक्षा कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया पर जोर पकड़ रहा है और छात्र न्याय की उम्मीद में एनटीए के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।