QR कोड स्कैम: एक स्कैन और आपका बैंक अकाउंट हो सकता है खाली, 2026 में तेजी से फैल रहे क्विशिंग स्कैम से बचने के उपाय

डिजिटल युग में क्यूआर कोड ने भुगतान और सेवाओं को अत्यंत सरल बना दिया है, लेकिन इस सुविधा के साथ साइबर अपराध के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। इन्हीं में से एक है ‘क्विशिंग’ (QR फिशिंग) स्कैम, जो 2026 में तेजी से फैल रहा है। इसमें धोखेबाज नकली क्यूआर कोड के जरिए उपयोगकर्ताओं को फर्जी वेबसाइटों पर ले जाकर उनकी बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और ओटीपी चुरा लेते हैं। आइए जानते हैं कि इस खतरे से कैसे बचा जा सकता है और क्यूआर कोड स्कैन करने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है।

कैसे काम करता है क्विशिंग स्कैम?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, क्विशिंग स्कैम में असली दिखने वाले क्यूआर कोड तैयार किए जाते हैं। इन्हें अक्सर असली कोड के ऊपर नकली स्टिकर चिपकाकर या फिर सार्वजनिक स्थानों पर लगा दिया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति अपने स्मार्टफोन से इस कोड को स्कैन करता है, वह सीधे एक धोखाधड़ी वाली वेबसाइट पर पहुंच जाता है। यह वेबसाइट बिल्कुल असली दिखती है और उपयोगकर्ता से बैंक खाते का विवरण, क्रेडिट कार्ड नंबर, पासवर्ड या ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी मांगती है। यह जानकारी मिलते ही स्कैमर्स खाते को खाली कर सकते हैं।

सुरक्षित स्कैनिंग का आसान नियम

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि क्यूआर कोड स्कैन करने का एक बहुत ही सरल और प्रभावी नियम है: पहले स्कैन करें, फिर लिंक को ध्यान से देखें, उसकी पुष्टि करें और उसके बाद ही खोलें। आधुनिक स्मार्टफोन, चाहे वह एंड्रॉयड हो या आईफोन, क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद वेबसाइट का एक पूर्वावलोकन (प्रीव्यू) दिखाते हैं। इस प्रीव्यू में लिंक (URL) दिखाई देता है। किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उस यूआरएल की बारीकी से जांच करना बेहद जरूरी है। अगर वेबसाइट का पता संदिग्ध लगता है, उसमें वर्तनी की गलतियां हैं, या कोई अतिरिक्त अक्षर जुड़े हुए हैं, तो उसे तुरंत बंद कर देना चाहिए।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद कोई वेबसाइट निम्नलिखित में से कुछ भी मांगती है, तो यह एक बड़ा खतरे का संकेत है:

  • बैंक खाते या कार्ड की गोपनीय जानकारी
  • पासवर्ड या लॉगिन क्रेडेंशियल्स
  • वन टाइम पासवर्ड (OTP)
  • कोई अनजान एप्लिकेशन डाउनलोड करने का निर्देश

इसके अलावा, छोटे, अजीब या अपरिचित दिखने वाले यूआरएल को भी संदिग्ध माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में आगे बढ़ने के बजाय, वेबसाइट की प्रामाणिकता की जांच करना ही बुद्धिमानी है।

सार्वजनिक स्थानों पर लगे क्यूआर कोड से सावधानी

साइबर अपराधी अक्सर उन जगहों को निशाना बनाते हैं जहां लोग जल्दबाजी में क्यूआर कोड स्कैन करते हैं। पार्किंग मीटर, दुकानों के भुगतान बोर्ड, रेस्टोरेंट की टेबल, सार्वजनिक पोस्टर और टिकटिंग सिस्टम जैसी जगहों पर नकली क्यूआर कोड लगाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसलिए किसी भी सार्वजनिक स्थान पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने से पहले दो बार सोचें और उसकी भौतिक स्थिति (जैसे कि वह चिपकाया गया है या प्रिंटेड है) पर ध्यान दें।

थर्ड-पार्टी स्कैनर एप से बचें

सुरक्षा एजेंसियां सलाह देती हैं कि क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए हमेशा अपने फोन के डिफ़ॉल्ट कैमरा एप का ही उपयोग करें। कई अनऑफिशियल या थर्ड-पार्टी क्यूआर स्कैनर एप्स आपकी जानकारी से अधिक अनुमतियां (परमिशन) मांगते हैं। ये एप्स आपकी निजी जानकारी, संपर्कों और फोटो तक पहुंच बना सकते हैं और डेटा चोरी का माध्यम बन सकते हैं। डिफ़ॉल्ट कैमरा एप का उपयोग करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

ईमेल और मैसेज में मिले क्यूआर कोड से खतरा

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अनजान ईमेल, व्हाट्सएप मैसेज, एसएमएस या डिलीवरी पार्सल के साथ भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन करने से पहले कई बार सोचना चाहिए। साइबर ठग अब पारंपरिक फिशिंग ईमेल के बजाय क्यूआर कोड का उपयोग कर रहे हैं, क्योंकि यह सुरक्षा फिल्टर को आसानी से बायपास कर सकता है। ऐसे किसी भी अप्रत्याशित क्यूआर कोड को स्कैन न करें, भले ही वह किसी जानी-पहचानी कंपनी या सेवा की ओर से आया हुआ प्रतीत होता हो।