पंजाब के निजी विश्वविद्यालय में बड़ी कार्रवाई: कुलपति पदमुक्त, कश्मीरी छात्रों से दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप

पंजाब के जगराओं स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में कश्मीरी मुस्लिम छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के कुलपति को पद से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई छात्रों द्वारा रमजान के पवित्र महीने के दौरान विशेष भोजन व्यवस्था की मांग को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद हुई है।

क्या था पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब कश्मीरी छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के मेस में उन्हें ‘सेहरी’ (भोर से पहले का भोजन) और ‘इफ्तार’ (रोजा खोलने का भोजन) के लिए उचित व्यवस्था नहीं दी गई। छात्रों का कहना था कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, तो उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। आरोपों के अनुसार, उन्हें छात्रावासों से बेदखल करने और प्रवेश रद्द करने की धमकी भी दी गई।

विरोध प्रदर्शन और प्रशासन का हस्तक्षेप

इस घटना के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों के परिवारों में गहरी चिंता व्याप्त हो गई थी। मामले ने तूल पकड़ा तो जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया और पंजाब के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।

लुधियाना के उपायुक्त हिमांशु जैन ने बताया कि जिला प्रशासन ने स्थिति को शांत करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया। पुलिस और सामुदायिक नेताओं के सहयोग से मामले को सुलझाने का प्रयास किया गया। शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने भी संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।

कुलपति का इस्तीफा और आंतरिक जांच

प्रशासनिक दबाव और बढ़ते विवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कुलपति नितिन टंडन को पद से हटाने का फैसला किया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति चरणजीत सिंह चन्नी ने मंगलवार को पुष्टि की कि कुलपति को इस्तीफा देने के लिए कहा गया था, जिसके बाद उन्होंने अपना पद छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि कुलपति और छात्रों के बीच भोजन व्यवस्था को लेकर तीखी बहस हुई थी, जिसके बाद छात्रों ने मेस में ताला लगा दिया था।

कुलाधिपति ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। स्थानीय अधिकारी भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कुलपति के इस्तीफे की घोषणा के बाद छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

प्रशासन की भूमिका और शांति बहाली

उपायुक्त हिमांशु जैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्थानीय प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए संवाद के माध्यम से मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन को भी धन्यवाद दिया, जिसने त्वरित निर्णय लेते हुए स्थिति को नियंत्रित करने में सहयोग किया। इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।