प्रोजेक्ट चीता: मध्य प्रदेश बना वन्यजीव पर्यटन का केंद्र, चीतों की संख्या 53 तक पहुंची

भारत में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रोजेक्ट चीता के तहत देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है। यह खबर न केवल संरक्षण प्रयासों को बल देती है, बल्कि वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी उत्साहवर्धक है। अधिकांश चीते कूनो नेशनल पार्क में मौजूद हैं, जबकि कुछ को गांधी सागर वन्यजीव उद्यान में स्थानांतरित किया गया है।

चीतों की बढ़ती संख्या और उनका ठिकाना

हाल ही में कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया। इस घटना के बाद देश में चीतों की संख्या 53 तक पहुंच गई है। प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत के बाद से कूनो नेशनल पार्क में चीतों का सफल प्रजनन देखने को मिला है। यह परियोजना भारत में चीतों की वापसी का प्रतीक बन चुकी है।

  • ज्वाला नामक मादा चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया।
  • देश में कुल चीतों की संख्या अब 53 हो गई है।
  • अधिकांश चीते कूनो नेशनल पार्क में रहते हैं।
  • कुछ चीतों को गांधी सागर क्षेत्र में बसाने की प्रक्रिया जारी है।

मध्य प्रदेश क्यों है खास?

मध्य प्रदेश को भारत का ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है। यहां देश में सबसे अधिक बाघ पाए जाते हैं। अब चीतों के आगमन ने इस राज्य के वन्यजीव पर्यटन को और समृद्ध किया है। घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और व्यवस्थित सफारी व्यवस्था इसे वन्यजीव प्रेमियों की पहली पसंद बनाती है। जंगल सफारी, टाइगर ट्रैकिंग और दुर्लभ प्रजातियों को करीब से देखने के लिए मध्य प्रदेश सबसे बेहतरीन स्थान है।

टाइगर सफारी के लिए प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान

यदि आप बाघ देखने के शौकीन हैं, तो मध्य प्रदेश के कई राष्ट्रीय उद्यान आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं। बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, कान्हा नेशनल पार्क, पेंच नेशनल पार्क और सतपुरा नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इन पार्कों में जंगल सफारी के दौरान बाघ देखने की अच्छी संभावना रहती है। वहीं चीते देखने के लिए कूनो नेशनल पार्क सबसे चर्चित गंतव्य बन चुका है।

मानसून में यात्रा की योजना

जून से सितंबर के बीच कई राष्ट्रीय उद्यानों के कोर जोन बंद रहते हैं। हालांकि, कुछ बफर जोन और निर्धारित क्षेत्र पर्यटकों के लिए खुले रहते हैं। यात्रा से पहले पार्क की आधिकारिक जानकारी जांचना जरूरी है। मानसून के दौरान हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है, जो सफारी के अनुभव को और खास बना देता है।