राष्ट्रपति मुर्मू ने आदिवासी छात्रों से संवाद किया, प्रतिभा को तराशने पर दिया जोर

जनजातीय गरिमा उत्सव के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में एक विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने जनजातीय मामलों के मंत्रालय की छात्रवृत्ति योजनाओं से लाभान्वित होने वाले लगभग 200 आदिवासी छात्रों से बातचीत की। राष्ट्रपति ने छात्रों के शैक्षिक अनुभवों, उनकी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।

राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदाय के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उन्हें बस सही मार्गदर्शन और अवसरों की आवश्यकता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें और उन्हें निखारने का प्रयास करें। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन यह संघर्ष ही सफलता की नींव रखता है।

सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं का महत्व

भारत सरकार जनजातीय युवाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। छात्रवृत्ति योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं हैं, बल्कि ये युवाओं को आगे बढ़ने के लिए पंख प्रदान करती हैं। ऐसे कई युवा हैं जिनमें अपार प्रतिभा है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वे अपनी क्षमता नहीं दिखा पाते। ये योजनाएं उनके लिए नए द्वार खोलती हैं।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि इनमें से कई युवाओं ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है और कुछ को विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन का अवसर भी मिला है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी इन छात्रों ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे लाखों अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।

समग्र विकास के लिए सभी की भागीदारी जरूरी

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि समाज के पिछड़े वर्गों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने अतीत को याद रखें और उन लोगों को भी साथ लेकर चलें जो पीछे रह गए हैं। बड़ा बनना अच्छी बात है, लेकिन संघर्ष जीवन का अभिन्न हिस्सा है। जो लोग आगे बढ़ गए हैं, उन्हें अपने समुदाय के अन्य लोगों को भी ऊपर उठाने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब सभी समाज, सभी वर्ग और सभी स्तर के लोग मिलकर आगे बढ़ें। सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए सभी की भागीदारी आवश्यक है। अपने स्तर पर थोड़ा प्रयास करके दूसरों को आगे लाना ही सच्ची प्रगति है।

अपनी पहचान और विरासत को संजोने का संदेश

राष्ट्रपति ने छात्रों को अपनी पहचान और विरासत को कभी न भूलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के पूर्वजों ने अपनी संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के लिए बड़े बलिदान दिए हैं। भगवान बिरसा मुंडा जैसे अनेक वीरों ने देश और इसकी मिट्टी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, जिनका इतिहास में उचित उल्लेख नहीं मिलता।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जनजातीय गौरव उत्सव मनाना अच्छी बात है, लेकिन हमें उनके संघर्षों को भी याद रखना चाहिए। संघर्ष के बाद ही खुशी और सफलता मिलती है। युवाओं की यह जिम्मेदारी है कि वे विकास की धारा से जुड़ते हुए अपनी विरासत का सम्मान करें और उसे संजोए रखें।

उन्होंने जनजातीय समुदाय के युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने लोगों को न भूलें। युवा शक्ति को अपनी विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक शिक्षा और तकनीक के बल पर आगे बढ़ना चाहिए। इसी से सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव होगा। राष्ट्रपति ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें और अपने समुदाय के लिए एक मिसाल बनें।