शिक्षा, नवाचार और महिला सशक्तिकरण: विकसित भारत की आधारशिला

शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार 2026 में देश के प्रधानमंत्री ने शिक्षा, कौशल विकास और महिलाओं की भागीदारी को विकसित भारत के निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस वेबिनार का विषय ‘सबका साथ, सबका विकास: जन आकांक्षाओं की पूर्ति’ रखा गया, जिसमें देशभर के शिक्षाविदों, संस्थान प्रमुखों, नीति निर्माताओं और छात्रों ने भाग लिया।

शिक्षा प्रणाली में निरंतर बदलाव की आवश्यकता

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले एक दशक में देश के युवाओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है। आज हर युवा कुछ नया करने की इच्छा रखता है। यह नई पीढ़ी का यह नया दृष्टिकोण ही देश की सबसे बड़ी ताकत और उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि इस ऊर्जा का सही उपयोग करने के लिए शिक्षा प्रणाली को लगातार अपडेट करना होगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने इस दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है, लेकिन अब इसे और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।

पाठ्यक्रम को बाजार की जरूरतों से जोड़ना

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा पाठ्यक्रम को बाजार की मौजूदा और भविष्य की जरूरतों के अनुसार अपडेट रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को वास्तविक दुनिया की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को और तेज करने की आवश्यकता है। इससे युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और वे देश के विकास में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेंगे।

एआई और ऑटोमेशन पर विशेष ध्यान

प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ऑटोमेशन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजाइन-आधारित विनिर्माण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने बताया कि देश में शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय टाउनशिप जैसे नए मॉडल इसी दृष्टिकोण का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा दे रहा है और नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

अनुसंधान-आधारित शिक्षा पर बल

प्रधानमंत्री ने शिक्षाविदों और शैक्षणिक संस्थानों से अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और अनुसंधान-आधारित शिक्षा की दिशा में विकसित करने पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों को वास्तविक दुनिया का अनुभव मिलेगा और कौशल पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत होगा। उन्होंने संस्थानों से युवा विद्वानों के बीच प्रयोग और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने का विशेष आग्रह किया और कहा कि प्रतिभा को छोटे से छोटे कस्बों और गांवों में भी पहचाना और पोषित किया जाना चाहिए।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने बताया कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) जैसे विषयों में रुचि रखने वाली बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा, “आज जब हम भविष्य की तकनीक के लिए तैयार हो रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि कोई भी बेटी अवसरों के अभाव में पीछे न रह जाए। हमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देना होगा और ऐसा माहौल तैयार करना होगा जहां युवा शोधार्थियों को प्रयोग करने और नए विचारों पर काम करने का पूरा अवसर मिले।”

खेलों को राष्ट्रीय विकास से जोड़ना

प्रधानमंत्री ने खेलों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति तभी राष्ट्र की शक्ति बनती है जब वह स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरी हो। इसलिए पिछले कुछ वर्षों में खेलों को राष्ट्रीय विकास की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा गया है। खेलो इंडिया जैसी पहलों ने देश में खेल पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊर्जा दी है और देशभर में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के सुझाव

प्रधानमंत्री ने पर्यटन और संस्कृति को रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बड़ी भूमिका निभाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि जब किसी स्थान पर पर्यटन बढ़ता है तो उस पूरे शहर या क्षेत्र का विकास तेज हो जाता है। उन्होंने बताया कि भारत में ऐतिहासिक स्थलों की कोई कमी नहीं है, लेकिन लंबे समय से पर्यटन देश के कुछ चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित रह गया है। अब सरकार देश के कोने-कोने में पर्यटन स्थलों को नए सिरे से विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने वेबिनार में शामिल सभी लोगों से भारत के पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समग्र दृष्टिकोण पर चर्चा करने का आग्रह किया।

विश्वविद्यालय टाउनशिप पर चर्चा

बजट में पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप विकसित करने की घोषणा पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का संचालन आईआईएससी के निदेशक ने किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का शोध और शिक्षा के क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह समय दूर नहीं जब डिग्री की महत्ता उतनी नहीं होगी जितनी कौशल और परिणामों की होगी। यह बदलाव शिक्षा जगत के लिए एक नई चुनौती और अवसर दोनों है।