परीक्षा पे चर्चा 2026: पीएम मोदी ने देशभर के विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया, 67 करोड़ से अधिक की भागीदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के 2026 संस्करण में देशभर के छात्रों के साथ सीधा संवाद किया। इस वर्ष यह आयोजन पूरे भारत में फैला रहा, जिसमें दिल्ली के अलावा कोयंबटूर, रायपुर, देव मोगरा और गुवाहाटी में भी सत्र आयोजित किए गए। इस पहल ने देश के चारों कोनों और मध्य क्षेत्र के छात्रों को एक मंच पर लाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
अभूतपूर्व भागीदारी और रिकॉर्ड
इस वर्ष के कार्यक्रम में 4.5 करोड़ से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया, जबकि 2.26 करोड़ से अधिक लोगों ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। कुल मिलाकर, इस आयोजन में 6.76 करोड़ से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता दर्ज की गई, जो शिक्षा और संवाद के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।
कार्यक्रम का स्वरूप और विस्तार
परीक्षा पे चर्चा का यह आठवां संस्करण था, जो 10 फरवरी 2025 को प्रसारित हुआ। नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में आयोजित इस कार्यक्रम में एक नए प्रारूप को अपनाया गया। इसमें हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से 36 छात्रों ने भाग लिया, जो सरकारी स्कूलों, केंद्रीय विद्यालयों, सैनिक स्कूलों, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों, सीबीएसई स्कूलों और नवोदय विद्यालयों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
इस बार के संस्करण में कई प्रेरणादायक विषयों पर चर्चा हुई। सात अलग-अलग एपिसोड में खेल और अनुशासन, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, प्रौद्योगिकी और वित्त, तथा रचनात्मकता और सकारात्मकता जैसे विषयों पर प्रसिद्ध हस्तियों ने अपने विचार साझा किए। प्रेरणा के पूर्व छात्रों के साथ-साथ कला उत्सव और वीर गाथा के विजेताओं ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और वैश्विक प्रभाव
2025 में, परीक्षा पे चर्चा ने एक उल्लेखनीय गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इस आयोजन में 245 से अधिक देशों के छात्रों, 153 देशों के शिक्षकों और 149 देशों के अभिभावकों ने भाग लिया। यह रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण है कि यह पहल अब केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुकी है।
उद्देश्य और महत्व
परीक्षा पे चर्चा का मुख्य उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को परीक्षाओं से जुड़े तनाव को प्रबंधित करने और जीवन कौशल सीखने के लिए एक मंच प्रदान करना है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पहल अब एक जन आंदोलन में बदल चुकी है। इसका लक्ष्य छात्रों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ परीक्षाओं का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस वर्ष के कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि संवाद और सहभागिता के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।