एपल के नए सीईओ: जॉन टर्नस, जिन्होंने हार्डवेयर इंजीनियरिंग को नई परिभाषा दी

काम के प्रति समर्पण का ऐसा स्तर कि हर छोटी से छोटी डिजाइन खुद तय करते हैं। यही वजह है कि उन्हें ‘मशीनों का जादूगर’ और ‘इंजीनियरों का इंजीनियर’ कहा जाता है। तीन दशकों के बाद जब कोई हार्डवेयर इंजीनियर एपल का सीईओ बनता है, तो उसमें कुछ खास बात जरूर होनी चाहिए।

शुरुआत: एक छोटे से प्रोजेक्ट से बड़ी सोच तक

1990 का दशक था और पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय का परिसर। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के एक छात्र ने एक ऐसी मशीन बनाई, जो शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को बिना हाथों का उपयोग किए खाना खाने में मदद करती थी। इस मशीन का नाम ‘मैकेनिकल फीडिंग आर्म’ रखा गया, जो सिर की हलचल से नियंत्रित होती थी। कुछ वर्षों बाद, जब वह एक बड़ी टेक कंपनी में जूनियर इंजीनियर के रूप में शामिल हुए, तो उन्हें एक कंप्यूटर मॉनिटर के पिछले हिस्से का स्क्रू डिजाइन करने का छोटा सा काम मिला।

परफेक्शन का जुनून

एक बार वह इंजीनियर आधी रात के बाद भी जाग रहे थे। उनके हाथ में मैग्नीफाइंग ग्लास था और वे पेंच की लकीरें गिन रहे थे। यह काम को पूर्णता के साथ करने का उनका जुनून था। उनकी सादगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रमोशन के बाद मिले आलीशान निजी केबिन को उन्होंने ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि वह अपने साथियों के साथ ही काम करना पसंद करेंगे। यह वही शख्स हैं, जिन्होंने एपल आईपैड की हर पीढ़ी, एयरपॉड्स की दुनिया और आईफोन के क्रांतिकारी बदलावों को अपनी देखरेख में पूरा किया।

इंजीनियरों के इंजीनियर

उनकी इंजीनियरिंग की समझ इतनी गहरी थी कि सहकर्मी उन्हें ‘इंजीनियरों का इंजीनियर’ कहने लगे। वर्षों तक पर्दे के पीछे रहकर आईफोन और मैक जैसे उत्पादों को तराशने वाले जॉन टर्नस आज पूरी दुनिया की सुर्खियों में हैं। एपल ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि टिम कुक के पद छोड़ने के बाद, एक सितंबर 2026 से टर्नस कंपनी के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में कमान संभालेंगे। टर्नस, तीन दशकों से अधिक समय में एपल के पहले ऐसे सीईओ होंगे, जो हार्डवेयर पृष्ठभूमि से आते हैं।

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का संतुलन

टर्नस केवल एक हार्डवेयर विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि उनके पास यह गहरा विजन है कि सॉफ्टवेयर को हार्डवेयर की सेवा कैसे करनी चाहिए। वह आईओएस से अलग आईपैडओएस बनाने के शुरुआती समर्थकों में से एक थे। उन्होंने एपल के सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख क्रेग फेडेरिधी से इस बात की पैरवी की थी कि आईपैड का शक्तिशाली हार्डवेयर मोबाइल फोन ऑपरेटिंग सिस्टम के कारण अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा है। उनका मानना था कि इसे अपनी पहचान बनाने के लिए एक अलग प्लेटफॉर्म की जरूरत है।

शिक्षा और करियर की शुरुआत

जॉन टर्नस का जन्म 1975 में कैलिफोर्निया, अमेरिका में हुआ। उन्होंने 1997 में यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उनके करियर की शुरुआत वर्चुअल रिसर्च सिस्टम्स में एक मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में हुई, जहां उन्होंने वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स पर काम किया। उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2001 में आया, जब वह एपल में शामिल हुए। यहां उनका सफर एक प्रोडक्ट डिजाइन टीम के सदस्य के रूप में शुरू हुआ। अपनी तकनीकी समझ और नेतृत्व क्षमता के कारण वह धीरे-धीरे ऊंचाइयों पर चढ़ते गए। 2013 में उन्हें हार्डवेयर इंजीनियरिंग का उपाध्यक्ष बनाया गया और 2021 में वह सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर आसीन हुए।

तैराकी से लेकर रेसिंग तक

टर्नस कॉलेज के दिनों में एक शानदार एथलीट थे। वह एक प्रतिस्पर्धी तैराक थे और उन्होंने एक प्रतियोगिता में 50 मीटर फ्रीस्टाइल और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले, दोनों में जीत हासिल की थी। उन्हें कॉलेज की पुरुषों की तैराकी टीम के लिए ‘ऑल-टाइम लेटर विनर’ (शीर्ष खिलाड़ी) नामित किया गया था। टर्नस एक शौकिया रैली कार रेसर भी हैं। वह अपने सहयोगियों को वाशिंगटन के ऊपरी इलाकों में रेसिंग के लिए ले जा चुके हैं।

अजीबोगरीब उपनाम और शौक

जॉन टर्नस को स्कूबा डाइविंग का भी शौक है। उन्हें पानी के अंदर वीडियो और फोटो लेना बेहद पसंद है। वह साइकिल चलाने के भी शौकीन माने जाते हैं। एक दिलचस्प बात यह है कि विश्वविद्यालय में एक प्रोजेक्ट बनाने के दौरान उन्होंने वहां रखी एकमात्र सीएनसी मिलिंग मशीन को तोड़ दिया था। इसी कारण लोग उन्हें ‘क्रैश’ उपनाम से पुकारने लगे। जॉन टर्नस स्टीव जॉब्स और टिम कुक को अपना मार्गदर्शक मानते हैं। उन्हें त्वरित और निर्णायक सोच के लिए जाना जाता है। उनकी अद्भुत इंजीनियरिंग सूझबूझ और जटिल समस्याओं के सरल समाधान खोजने की कला के कारण उन्हें ‘मशीनों का जादूगर’ भी कहा जाता है।