टेलीग्राम बैन पर पावेल ड्यूरोव का बयान: ‘पेपर लीक करने वालों की जगह 15 करोड़ यूजर्स को सजा’
भारत सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाई गई अस्थायी रोक को लेकर कंपनी के सीईओ पावेल ड्यूरोव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कदम को अनुचित बताते हुए कहा कि इससे दोषियों के बजाय आम उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। यह कार्रवाई नीट 2026 री-एग्जाम से जुड़े विवाद के बीच की गई है, जिसमें परीक्षा सामग्री लीक होने के आरोप लगे थे।
ड्यूरोव ने सरकार के फैसले को क्यों बताया गलत?
पावेल ड्यूरोव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार के इस फैसले को ‘बड़ी भूल’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इससे उन लाखों भारतीयों को असुविधा होगी जो रोजमर्रा के संचार के लिए इस प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं।
- आम यूजर्स पर असर: ड्यूरोव ने स्पष्ट किया कि इस बैन का सीधा नुकसान उन 15 करोड़ भारतीय यूजर्स को हो रहा है, जो अपने निजी और व्यावसायिक कामों के लिए टेलीग्राम का उपयोग करते हैं। असली दोषी यानी पेपर लीक करने वाले इस कार्रवाई से बच रहे हैं।
- पहले ही हटाए गए चैनल: उन्होंने बताया कि टेलीग्राम ने पिछले कुछ हफ्तों में भारत में परीक्षा से जुड़ी लीक सामग्री साझा करने वाले सैकड़ों चैनलों को हटा दिया था। कंपनी ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पहले ही कदम उठा लिए थे।
- फीचर में सुधार की तैयारी: कंपनी अब अपने ‘एडिटेड लेबल’ को और अधिक स्पष्ट बनाने पर काम कर रही है, ताकि पुरानी तारीख दिखाकर किए जाने वाले धोखाधड़ी के प्रयासों को रोका जा सके।
दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर उठाए सवाल
ड्यूरोव ने अपने बयान में दूसरे मैसेजिंग ऐप्स पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उनका कहना था कि सिर्फ टेलीग्राम को ब्लॉक करने से कोई हल नहीं निकलेगा, क्योंकि पेपर लीक करने वाले अब दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लीक सामग्री अन्य ऐप्स पर भी साझा की जा सकती है, तो कार्रवाई केवल टेलीग्राम तक ही क्यों सीमित है?
सरकार और NTA ने क्यों लगाया प्रतिबंध?
भारत सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने यह कदम टेलीग्राम के एक विशेष फीचर के दुरुपयोग के कारण उठाया है। जांच में सामने आया कि टेलीग्राम का मैसेज एडिट फीचर फर्जी सबूत बनाने का जरिया बन गया था।
- कैसे हो रहा था दुरुपयोग: कुछ चैनल एडमिन परीक्षा समाप्त होने के बाद अपने पुराने मैसेज को एडिट कर उसमें प्रश्न पत्र की तस्वीर जोड़ देते थे। चूंकि मैसेज पुराना था, इसलिए उसका टाइमस्टैम्प भी पुराना दिखता था।
- मकसद क्या था: इस तकनीक का उपयोग यह झूठ फैलाने के लिए किया जाता था कि प्रश्न पत्र परीक्षा से काफी पहले ही लीक हो गया था, जिससे छात्रों और परीक्षा प्रणाली में भ्रम पैदा होता था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि टेलीग्राम पर यह अस्थायी रोक परीक्षा के बाद फर्जी सबूत बनाने और उन्हें वायरल करने की साजिश पर लगाम लगाने के लिए जरूरी थी। हालांकि, इस बैन ने एक बार फिर टेलीग्राम की सुरक्षा नीतियों और उसके प्लेटफॉर्म पर होने वाली गतिविधियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।