मरीजों की सुरक्षा: आपातकाल में अब 20 मिनट में पहुंचेगी एंबुलेंस, सरकार ने लागू किए नए मानक

हार्ट अटैक, स्ट्रोक या सड़क दुर्घटना जैसी गंभीर स्थितियों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलना जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क तय करता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जितनी जल्दी मरीज को अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू किया जाता है, उसके बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। अक्सर देखा गया है कि इलाज में देरी बीमारी से भी अधिक घातक साबित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में आपातकालीन सेवाओं को सबसे अहम माना जाता है।

भारत जैसे विशाल देश में, जहां बड़े शहरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर अलग-अलग है, एक भरोसेमंद और जवाबदेह एंबुलेंस प्रणाली की लंबे समय से कमी महसूस की जा रही थी। अब सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना नहीं है, बल्कि रास्ते में ही उसे बेहतर चिकित्सा सहायता प्रदान करना और पूरी सेवा को जवाबदेह बनाना है।

राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा (NAS) के नए दिशा-निर्देश

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा ऑपरेशनल गाइडलाइन (NAS) जारी कर दी है। यह पहली बार है जब देशभर में एंबुलेंस सेवा के लिए एक समान राष्ट्रीय मानक लागू किए जाएंगे। इन मानकों का पालन न करने पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। यह बदलाव आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपातकाल कभी पूर्व सूचना देकर नहीं आता और किसी को भी कभी भी एंबुलेंस की जरूरत पड़ सकती है।

समय सीमा तय: 20 मिनट में पहुंचेगी मदद

नई गाइडलाइन के तहत सबसे बड़ा बदलाव प्रतिक्रिया समय को लेकर है। अब आपातकालीन कॉल मिलने के बाद एंबुलेंस को औसतन 20 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचना अनिवार्य होगा। वहीं, कॉल सेंटर को कॉल प्राप्त होने के तीन मिनट के अंदर एंबुलेंस रवाना करनी होगी। इसके अलावा, कॉल सेंटर को 95 प्रतिशत कॉल्स को 20 सेकंड के भीतर उठाना होगा और जो भी कॉल ड्रॉप या मिस होती है, उन सभी पर वापस कॉल करना अनिवार्य होगा।

प्रशिक्षित कर्मचारी और डॉक्टरों की ड्यूटी

नए नियमों के अनुसार, हर एंबुलेंस में एक प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और चालक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि मरीज को रास्ते में भी बुनियादी चिकित्सा सहायता मिलती रहे। इससे भी आगे बढ़ते हुए, अब कॉल सेंटर में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी। ये डॉक्टर आपात स्थिति में फोन पर ही EMT को मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज से संबंधित सलाह देंगे, जिससे मरीज को बेहतर और त्वरित प्राथमिक उपचार मिल सकेगा।

गुणवत्ता की जांच और मानकों का पालन

नई गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी निजी एजेंसी की एंबुलेंस को सेवा में शामिल करने से पहले जिला स्तरीय समिति द्वारा उसकी गहन जांच की जाएगी। वाहन को सभी निर्धारित शर्तों पर खरा उतरना होगा, तभी उसे संचालन की अनुमति मिलेगी। यह कदम एंबुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता, जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 16वीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की बैठक में ये दिशा-निर्देश जारी किए। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश में एंबुलेंस सेवाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और मरीज-केंद्रित बनाना है। उम्मीद की जा रही है कि इन मानकों के लागू होने से आपातकालीन स्थितियों में लोगों को तेज और बेहतर चिकित्सा सहायता मिलेगी, जिससे अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकेगा।

यह लेख चिकित्सा रिपोर्टों और विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लेना उचित रहेगा।