परशुराम जयंती 2026: शुभ योग में मनाया जाएगा जन्मोत्सव, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और आरती

आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम की जयंती मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ था। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ और पवित्र तिथि माना जाता है, जिसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी कार्य कभी नष्ट नहीं होता। यही कारण है कि आज भगवान परशुराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान परशुराम को चिरंजीवी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर बढ़ते अधर्म का नाश करने के लिए परशुराम के रूप में अवतार लिया था। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अत्याचारी राजाओं का संहार किया था। आइए जानते हैं परशुराम जयंती के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्रों के बारे में।

कौन हैं भगवान परशुराम?

भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। उनका जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। जन्म के समय उनका नाम ‘राम’ रखा गया। बाद में, भगवान शिव ने उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें ‘परशु’ (फरसा) प्रदान किया, जिसके कारण वे ‘परशुराम’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।

परशुराम जयंती तिथि 2026

पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर, 19 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाएगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त

परशुराम जयंती पर पूजा के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं:

  • प्रथम मुहूर्त: 19 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 29 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक।
  • द्वितीय मुहूर्त: 19 अप्रैल को शाम 6 बजकर 49 मिनट से रात 10 बजकर 57 मिनट तक।

श्री परशुराम आरती

ॐ जय परशुराम देव, प्रभु जय परशुराम देव।
शौर्य तेज बल-बुद्धि धाम की॥
आरती कीजे श्री परशुराम की॥

रेणुकासुत जमदग्नि के नंदन।
कौशलेश पूजित भृगु चंदन॥
अज अनंत प्रभु पूर्णकाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥1॥

नारायण अवतार सुहावन।
प्रगट भए महि भार उतारन॥
क्रोध कुंज भव भय विराम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥2॥

परशु चाप शर कर में राजे।
ब्रह्मसूत्र गल माल विराजे॥
मंगलमय शुभ छबि ललाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥3॥

जननी प्रिय पितृ आज्ञाकारी।
दुष्ट दलन संतन हितकारी॥
ज्ञान पुंज जग कृत प्रणाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥4॥

परशुराम वल्लभ यश गावे।
श्रद्धायुत प्रभु पद शिर नावे॥
छहहिं चरण रति अष्ट याम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥5॥