परीक्षा पे चर्चा 2026: पीएम मोदी का छात्रों से संवाद, सपनों और कर्म पर अनमोल सीख
परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण की शुरुआत आज सुबह दस बजे से हो चुकी है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधा संवाद कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव से मुक्त करना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और करियर से जुड़ी उनकी शंकाओं का समाधान करना है। इस बार यह आयोजन नए अंदाज में किया जा रहा है, जिसमें देश के कोने-कोने से छात्रों को जोड़ने और उनके सवालों के सीधे जवाब देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
परीक्षाएं मुश्किल क्यों लगने लगती हैं?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई छात्र और शिक्षक वर्षों से एक ही पुराने तरीके को अपनाए हुए हैं। पहले श्योर सवाल, फिर जरूरी प्रश्न और उसके बाद पिछले दस सालों के पैटर्न से ही तैयारी की जाती है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि यह “बीमारी” उनके समय में भी थी। उन्होंने आगे बताया कि कुछ शिक्षक इस सोच को बढ़ावा देते हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि उनकी क्लास या स्कूल का रिजल्ट अच्छा आए। इसलिए वे सिर्फ वही पढ़ाते हैं जिससे नंबर मिल सकें। लेकिन एक अच्छा शिक्षक बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देता है, पूरा सिलेबस पढ़ाता है और यह भी समझाता है कि पढ़ाई का जीवन में क्या महत्व है।
आज की मेहनत, 2047 का मजबूत भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से विकसित भारत के सपने को लेकर सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि भारत को विकसित देश बनने में कितना समय लगना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि उनका लक्ष्य साल 2047 है, क्योंकि तब भारत की आजादी के 100 साल पूरे होंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि उस समय वे सभी बड़े हो जाएंगे, इसलिए आज की मेहनत उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए है। प्रधानमंत्री ने छात्रों को याद दिलाया कि महात्मा गांधी और भगत सिंह जैसे देशभक्तों ने आजादी के लिए कड़ी मेहनत की थी। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने देश के लिए इतना कुछ किया, तो हम सब मिलकर विकसित भारत बनाने के लिए मेहनत क्यों नहीं कर सकते?
तकनीक पढ़ाई में मददगार: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तकनीक एक बेहतरीन शिक्षक है। उन्होंने बताया कि आज के समय में छात्रों को तकनीक की मदद पहले से कहीं ज्यादा मिल रही है, जो पहले संभव नहीं थी। पीएम मोदी ने कहा कि छात्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग पढ़ाई के नोट्स या सारांश बनाने में कर सकते हैं। साथ ही, AI से सुझाव लेकर अपनी समझ और सोच को और बेहतर बनाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक से लक्ष्य जल्दी नहीं मिल जाता, लेकिन यह पढ़ाई में एक मजबूत सहायक जरूर बन सकती है।
विकसित भारत के सपने पर पीएम मोदी का संदेश
छात्रों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्होंने कुछ जरूरी आदतों और सोच पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं को अपने अंदर कौशल, आत्मविश्वास और अच्छी सेहत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि देश को आगे बढ़ाने के लिए मेड इन इंडिया को अपनाना बहुत जरूरी है। साथ ही साफ-सफाई का ध्यान रखना और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने समय की अहमियत बताते हुए भारतीय मानक समय को लेकर भी सोच बदलने की बात कही। विदेशी सामान पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसी चीजें इस्तेमाल करते हैं, जो बाहर के देशों में बनी होती हैं। हमें धीरे-धीरे भारतीय उत्पादों को अपनाने की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम खुद अपने देश की चीजों पर भरोसा दिखाएंगे, तभी दुनिया भी उन्हें सम्मान देगी।
पढ़ाने की गति छात्रों की समझ के अनुसार हो: पीएम मोदी
एक छात्र ने कहा कि कई बार वह स्कूल या शिक्षक की पढ़ाने की गति से मेल नहीं बैठा पाता। जो पाठ छूट जाता है, उसे पूरा करने की कोशिश में आगे की पढ़ाई भी छूटने लगती है। छात्र ने पूछा कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनका जवाब खास तौर पर शिक्षकों के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह छात्रों की गति से सिर्फ एक कदम आगे रहें, उससे ज्यादा नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो हमारी पहुंच में हो, लेकिन जिसे पाने के लिए हमें थोड़ा प्रयास करना पड़े। लक्ष्य इतना दूर नहीं होना चाहिए कि हम हताश हो जाएं।
कौन-सी छोटी आदत सपनों को पूरा करने में मदद करती है?
इस सवाल पर एक छात्र ने प्रधानमंत्री मोदी से मार्गदर्शन मांगा। जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहला सुझाव दिया कि महान लोगों की जीवनियां पढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे यह समझ आता है कि आज जो लोग बड़े और सफल हैं, वे भी कभी हमारी ही तरह सामान्य हालात में थे। पीएम मोदी ने बताया कि जीवनियां पढ़ने से हमें सही और व्यावहारिक योजना बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यह याद रहता है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि सीढ़ी की तरह कदम-दर-कदम आगे बढ़कर हासिल होती है। हर सफल व्यक्ति भी एक इंसान होता है, जिसने मेहनत और धैर्य से मंजिल पाई होती है।
सफलता कर्म से ही मिलेगी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सपने देखना कोई अपराध नहीं है। सपने तो जरूर देखने चाहिए, लेकिन सिर्फ सपनों के बारे में सोचते रहना या उन्हें गुनगुनाते रहना किसी काम का नहीं होता। उन्होंने कहा कि जीवन में कर्म सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमें यह सोचकर मेहनत करनी चाहिए कि हम जहां हैं, वहीं से सफल होना है। सही मेहनत और लगन से हर जगह से सफलता हासिल की जा सकती है।
आराम से बाहर निकलना ही आगे बढ़ने की कुंजी
एक छात्र ने सवाल किया कि छोटे घर और कामकाज के माहौल में पढ़ाई करना बहुत मुश्किल होता है। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि सुविधाएं हों तभी क्षमता आती है। प्रधानमंत्री ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे नंबर लाने वाले कई छात्र छोटे-छोटे गांवों से होते हैं, जहां सुविधाएं कम होती हैं। लेकिन मेहनत, लगन और सही सोच से कोई भी छात्र आगे बढ़ सकता है।
गेमिंग में करियर पर पीएम मोदी की सलाह
एक छात्र ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि उसे गेमिंग में रुचि है, लेकिन समाज और लोग उसे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देने को कहते हैं। छात्र ने बताया कि उसे लगता है कि उसका भविष्य गेमिंग में है और उसने पूछा कि उसे क्या करना चाहिए। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया कि शुरुआत में माता-पिता अक्सर मना करते हैं, यह सामान्य बात है। लेकिन उन्होंने छात्र को सलाह दी कि शांत रहकर मेहनत करते रहो और खुद को साबित करो। पीएम मोदी ने कहा कि जब आप अपने काम में सफलता पा लेते हैं और कोई मेडल या पहचान हासिल कर लेते हैं, तो वही सफलता माता-पिता और परिवार का सम्मान बन जाती है। इसके बाद कोई आपको रोकता नहीं है।
बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षा: क्या दोनों साथ चल सकते हैं?
इस सवाल पर परीक्षा पे चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों की पहली प्राथमिकता बोर्ड परीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षा आपके शैक्षणिक जीवन की नींव होती है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगर आपने बोर्ड के सिलेबस से जुड़े अध्यायों को अच्छे से समझ लिया है, तो उनके अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग से बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती। सही समझ और कॉन्सेप्ट क्लियर होने से बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षा – दोनों की तैयारी साथ-साथ हो सकती है।